पेड़ों की छांव में पढ़ाए थे सरकारी स्कूल के छात्र, मेरिट में आए 11 में से आए चार छात्र

झज्जर। गांव ग्वालीसन के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों व बच्चों की लगन ने विपरीत परिस्थितियों में भी 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में बेहतर प्रदर्शन किया है। विद्यालय का परीक्षा परिणाम जहां शत प्रतिशत रहा वहीं विद्यालय की चार छात्राओं ने मेरिट सूची में नाम दर्ज कराया हे। बाकी विद्यार्थियों ने भी 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया है। इस विद्यालय के हालात पूरी तरह से दयनीय हैं। पिछले मानसून के सीजन में विद्यालय के कमरों की छत भी गिर गई थी। बच्चों को बैठकर पढ़ाई करने के लिए भी स्थान नहीं है। कक्षा छठी से बारहवीं तक 142 विद्यार्थी इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मात्र दो कमरे इस स्कूल में कुछ हद तक ठीक हैं। इनमें एक कमरे में साइंस लैब है और एक कमरा है। कुछ कक्षाओं को साइंस लैब में और कुछ को एक कमरे में बैठाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को स्कूल में मौजूद पेड़ों के नीचे बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल भवन की तारबंदी कर दी गई है। स्कूल भवन के इन कमरों पर तार बंदी कर उन पर खतरा लिखा गया है ताकि बच्चेे इन कमरों में न जाएं।

स्कूल में न मुखिया और न चपरासी
इस स्कूल के हालात ये हैं कि यहां पर न तो प्राचार्य है और न ही स्कूल में चपरासी है। स्कूल में कमरों की सफाई भी बच्चों या शिक्षकों को ही करनी पड़ती है। इन हालातों में भी अगर परीक्षा परिणाम बेहतर आए तो उन शिक्षकों के जज्बे को सलाम कहा जा सकता है। हालांकि शिक्षा विभाग की तरफ से गांव की चौपाल में स्कूल चलाने की योजना तैयार की थी। लेकिन वह भी सफल होती नजर नहीं आई।
इन छात्राओं ने पाई मेरिट
इस विद्यालय में बारहवीं कक्षा में 11 विद्यार्थी थे। जिन में से चार ने मेरिट सूची में नाम दर्ज करवाया है। वहीं सात बच्चों ने 60 प्रतिशत अधिक अंक प्राप्त किये हैं। विद्यालय की छात्रा कीर्ति ने 88.6, शिल्पा ने 85.02, आशारानी ने 80.60 व निशा ने 77.06 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में नाम दर्ज कराया है। इस विद्यालय में 16 अध्यापक व प्राध्यापक हैं। इन शिक्षकों का वेतन आदि के लिए दूसरे स्कूल के प्राचार्य को डीडीओ बनाया गया है।
विपरीत हालातों में भी शिक्षकों और बच्चों की मेहनत रंग लाई है। विद्यालय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है जबकि विद्यालय में बच्चों को बैठने तक का उचित स्थान नहीं है। – नवभार यादव, विज्ञान अध्यापक, राजकीय स्कूल ग्वालीसन।

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