दिल्ली-एनसीआर में 70 फीसदी माता-पिता मानते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से यहां की सड़कें उनके बच्चों के लिए असुरक्षित

दिल्ली-एनसीआर में करीब 70 फीसदी माता-पिता मानते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से यहां की सड़कें उनके बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। इसके पीछे उन्होंने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन सहित कई कारण गिनाए हैं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने शुक्रवार को यह सर्वे जारी किया। सड़क सुरक्षा पर काम करने वाली एनजीओ सेव लाइफ फाउंनडेशन के एक कार कंपनी के साथ मिलकर देश के 11 शहरों में किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे में मात्र 15 फीसदी लोगों ने अपने बच्चों के लिए दिल्ली की सड़कों को सुरक्षित बताया है। 13 फीसदी लोगों ने इस पर मिला-जुला जवाब दिया। सर्वे में शामिल 65 फीसदी अभिभावकों ने आवाजाही के लिए चार पहिया वाहनों को सबसे सुरक्षित माना है। वहीं, 10 फीसदी ने दुपहिया, 11 फीसदी ने बस, तीन फीसदी ने तिपहिया और 10 फीसदी ने परिवहन के अन्य साधनों को सुरक्षित बताया है।

इन कारणों से सड़कों को असुरक्षित बताया
– लोगों का तेज गति, लापरवाही से वाहन चलाना
– गलत साइड से ओवरटेक करना
– शराब पीकर वाहन चलाना
– फुटपाथ पर वाहन चलाना, फुटपाथ न होना
– सड़क पर अवैध पार्किंग, सीवर के खुले ढक्कन
– वाहन चलाते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल
– बिना हेलमेट, लाइसेंस के वाहन चलाना
– चौराहों पर लालबत्ती व जेब्रा लाइन न होना
– संकरी सड़कें, गड्ढे, तीव्र मोड़ व स्पीड ब्रेकरों की कमी
– फुटओवर ब्रिज, सब-वे की कमी
– सड़कों पर अधिक संख्या में वाहन
– ट्रैफिक पुलिस व अन्य नियंत्रण अथॉरिटी की कमी
– यातायात नियम तोड़ने पर सख्त कानून न होना
– स्कूलों के आसपास पुलिसकर्मियों की कमी

इन तरीकों को सुरक्षित माना

– कार व दुपहिया में बच्चे निगरानी में रहते हैं
– कार में गोदी में बैठते हैं, आंखों के सामने रहते हैं
– कार धीरे चलाते हैं, ओवरटेक नहीं करते
– शराब पीकर नहीं चलाते, ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं
– दुपहिया पर बच्चे परिजनों के पीछे उनको पकड़कर बैठते हैं
– कई दुपहिया पर बच्चों के लिए अतिरिक्त सीट भी लग जाती है
– बसों में सीट मिल जाती है जहां बच्चों को साथ बैठा लेते हैं
– बच्चों को पकड़कर रहते हैं, आसपास रखते हैं
– भीड़ वाली बस में नहीं चढ़ते

पिछली सीट पर बेल्ट बांधने में दिल्ली नंबर वन

सर्वे में यह भी सामने आया है कि गाड़ी में पिछली सीट पर बैठकर सीट बेल्ट लगाने में दिल्ली-एनसीआर के लोग पहले स्थान पर हैं। सर्वे के दौरान कुल 1353 यात्रियों और 1077 वाहनों पर पिछली सीट पर बैठे लोगों के सीट बेल्ट लगाने पर निगाह रखी गई। करीब 1.8 फीसदी लोगों ने सीट बेल्ट लगाई, जिसमें सबसे अधिक 4 फीसदी लोग दिल्ली के थे। वहीं, मुंबई में 2.4 फीसदी, बेंगलुरु में 2.1 फीसदी लोगों ने ही पिछली सीट पर बैठने के दौरान सीट बेल्ट लगाई। जयपुर, कोलकता और लखनऊ में गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे एक भी शख्स ने सीट बेल्ट नहीं लगाई।

बच्चे अधिक सजग
दिल्ली-एनसीआर में करीब 69 फीसदी बच्चों को गाड़ी में सफर करते हुए हमेशा सीट बेल्ट लगाने की आदत है। 24 फीसदी कभी-कभी बेल्ट लगाते हैं। वहीं, केवल छह फीसदी बच्चे बेल्ट नहीं लगाते। हालांकि, सर्वे के दौरान इस संबंध में पूछने पर सभी बच्चों ने सीट बेल्ट लगाने को बेहद महत्वपूर्ण माना।

देश में बिना सीट बेल्ट हादसों में मौत, घायल
वर्ष        2017
मौत (चालक)    26,896
मौत (सवारी)    16876
घायल (चालक)    00000
घायल (सवारी)    31421

यह भी जानें
रोजाना 1600 चालान

बिना सीट बेल्ट पहने वाहन चलाने पर रोजाना दिल्ली में करीब 1600 से अधिक लोगों के चालान काटे जा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में दिल्ली में बिना सीट बेल्ट के 6.25 लाख चालान किए गए। हर माह करीब 50 हजार से ज्यादा चालान किए जा रहे हैं।

इन हादसों से भी सबक नहीं लिया
– 27 नवंबर 2018 : तिमारपुर में स्कूल वैन और टैंपो के बीच टक्कर हो गई। हादसे में आठ साल के एक बच्चे की मौत हो गई, वहीं नौ बच्चे घायल हो गए।
– 26 अप्रैल 2018 : कन्हैया नगर में दूध के टैंकर ने स्कूल वैन को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूल वैन के परखच्चे उड़ गए और सात साल की सुमन की मौत हो गई थी। जबकि, 11 बच्चे घायल हो गए थे। घटना को अंजाम देने वाले टैंकर चालक ने शराब पी रखी थी।
– 31 जनवरी 2018 : मंगोलपुरी इलाके में 21 छात्रों को लेकर जा रही स्कूल वैन मोड़ते समय पलट गई। हादसे में 12 छात्र घायल हो गए थे। जांच में पाया गया कि वैन ने ट्रैफिक के कई नियमों का उल्लंघन किया था।

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