अगले 50 साल में आएंगी हजारों महामारियां:2070 तक जानवरों से इंसानों में फैलेंगे 15 हजार वायरस, इसके पीछे क्लाइमेट चेंज का हाथ

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समाचार क्यारी डेस्क , क्लाइमेट चेंज का भयानक असर केवल मौसम बदलने और तापमान बढ़ने के रूप में नहीं, बल्कि महामारियों के रूप में भी देखने को मिलेगा। अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, साल 2070 तक दुनिया हजारों महामारियों का सामना कर सकती है। वहीं कम से कम 15 हजार वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने की आशंका है।

एशिया, अफ्रीका में फैलेंगी बीमारियां

नेचर जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च के मुताबिक, अगले 50 सालों में एशिया और अफ्रीका में महामारियां फैलने की संभावना ज्यादा है। ये महाद्वीप पहले ही फ्लू, HIV, इबोला और कोरोना वायरस जैसी जानलेवा महामारियों के हॉटस्पॉट्स बन चुके हैं। यहां इंसान से जानवर और जानवर से इंसान में भी बीमारियां ट्रांसफर होते देखी गई हैं।

क्लाइमेट चेंज के कारण जानवरों का माइग्रेशन होगा

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण अगले 50 सालों में अगर पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, तो 3 हजार से ज्यादा स्तनधारी प्रजातियां दूसरे इलाकों में बसने को मजबूर हो जाएंगी। इसके चलते वायरस भी उनके साथ माइग्रेट होंगे और इन इलाकों में पहले से मौजूद जानवरों में फैल जाएंगे। ये आगे जाकर इंसानों की बड़ी आबादी को भी संक्रमित करेंगे।

फिलहाल इंसान को 10 हजार वायरस से खतरा

रिसर्च के अनुसार, अभी जानवरों में ऐसे 10 हजार वायरस मौजूद हैं, जो आगे जाकर इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। ये कोरोना जैसी बड़ी महामारी का रूप भी ले सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2070 तक केवल स्तनधारी प्रजातियों के बीच ही 4 हजार बार वायरस फैलेंगे। इस रिसर्च में पक्षियों और समुद्री जीवों को शामिल नहीं किया गया था।

चमगादड़ सबसे ज्यादा वायरस फैलाएंगे

वैज्ञानिकों का दावा है कि अगले कुछ सालों में चमगादड़ सबसे ज्यादा वायरस फैलाएंगे क्योंकि ये दूर-दूर तक उड़ने में सक्षम होते हैं। बता दें कि कुछ लोग चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस के लिए भी चमगादड़ को ही जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस थ्योरी की पुष्टी नहीं की है।

बीमारियों से बचने के लिए प्रदूषण कम करना जरूरी

स्टडी में शामिल वैज्ञानिक कोलिन कार्लसन कहते हैं कि यदि भविष्य की महामारियों से बचना है तो हमें क्लाइमेट चेंज के बुरे असर से बचना होगा। ग्लोबल वॉर्मिंग और वायरस संक्रमण का कनेक्शन गहरा होता जा रहा है। इससे नए वायरस पैदा होने और फैलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसलिए हमें ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन और ईंधन के इस्तेमाल को कम करना होगा।

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