जल संचयन की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही हरियाणा सरकार : डीसी

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किसानों को वैकल्पिक फसलों को अपनाने पर मिलेंगे 7 हजार, देसी कपास को बढ़ावा देने पर मिलते हैं 3 हजार प्रति एकड़
 
समाचार क्यारी, रेवाड़ी , संजय शर्मा,हिमांशु:- डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में पानी की उपलब्धता की चुनौती के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण के लिए अनेक कारगर कदम उठाएं हैं। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की दूरगामी सोच के फलस्वरूप हरियाणा सरकार द्वारा जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। जल ही जीवन है और प्रदेश में जल की उपलब्धता कैसे अधिक से अधिक हो, इसके लिए हरियाणा सरकार लगातार प्रयासरत है।
मेरा पानी मेरी विरासत योजना भी जल संरक्षण में काफी अहम :
डीसी अशोक कुमार गर्ग ने बताया कि जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। मेरा पानी मेरी विरासत योजना भी जल संरक्षण में काफी अहम भूमिका निभा रही है। हरियाणा सरकार की इस अनूठी योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत धान के स्थान पर कम पानी से तैयार होने वाली अन्य वैकल्पिक फसलें जैसे कपास, मक्का, दलहन, मूंगफली, तिल, ग्वार, अरंड, सब्जियां व फल आदि की खेती करने पर किसानों को सरकार की ओर से 7 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके अलावा किसानों को देसी फसल को बढ़ावा देने पर भी सरकार की ओर से 3 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
माइक्रो इरिगेशन अपनाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहन
उपायुक्त ने बताया कि वहीं प्रदेश में किसानों को माइक्रो इरिगेशन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई के उपकरणों पर सरकार द्वारा खासा अनुदान दिया जा रहा है। खेत में तालाब निर्माण के लिए किसान को कुल खर्च पर 70 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। इस प्रकार किसान को केवल 30 प्रतिशत राशि का ही भुगतान करना होता है। इसी तरह 2 एचपी से 10 एचपी तक की क्षमता वाले सोलर पंप लगाने के लिए किसान को 25 प्रतिशत राशि देनी होती है, जिस पर किसान को 75 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। सूक्ष्म सिंचाई से ना केवल किसानों को पूरा पानी मिलेगा, बल्कि आगामी कई सालों तक खेती के लिए पर्याप्त पानी का पक्का प्रबंध भी होगा। उन्होंने बताया कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को 30 जून तक मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इस बारे में अधिक जानकारी कृषि अधिकारी व खंड कृषि अधिकारी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।

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