गुप्त नवरात्रि 22 जून से 01 जुलाई 2020 तक

गुप्त नवरात्र सनातन धर्म में उसी प्रकार मान्य हैं, जिस प्रकार आश्विन और चैत्र नवरात्र। आषाढ़ और माघ माह के नवरात्रों को गुप्त नवरात्र कह कर पुकारा जाता है। इसके रहस्य छिपे हुए होने के कारण इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त नवरात्र मनाने और इनकी साधना का विधान देवी भागवत व अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। समस्त् सृष्टि की आधारभूत, शक्तिमयी व आन्तरिक प्रेरणा माता जगदम्बा की पूजा-अर्चना तथा उपासना करना प्रत्येक सनातनी का धर्म है। गुप्त नवरात्रि के सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रोंक्त मतानुसार बतलाया कि:- सर्वसिद्धि का अवसर है गुप्त नवरात्रि। हर वर्ष की भांति इस वर्ष 22 जून  (सोमवार) से 01 जुलाई (बुधवार) 2020 तक है।

साल में माघ, चैत, आषाढ तथा आश्विन माह में यानी कुल चार नवरात्र मनाने का शास्त्र सम्मत विधि-विधान है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक माता जगत जननी जगदम्बा की पूजा-अर्चना व्रत तथा उपासना विशेष प्रभावी और फलदायी होते हैं। माघी, आषाढी नवरात्र को गुप्त नवरात्र की संज्ञा प्राप्त है। यह नवरात्र अधिकतर “तंत्र साधक” करते हैं। विद्यार्थी वर्ग को माघी (वसंती) नवरात्र, गृहस्थ को चैती तथा आश्विन नवरात्री में व्रत, श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ व पूजा-अर्चना तथा उपासना अवश्य करनी चाहिये। ऐसा करने से आत्म-बल में वृद्धि, सुख-समृद्धि, प्रेम-वैभव तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

साधको को सभी नवरात्रि करने का शास्त्र-समम्त विधान है। माघी (वसंती) नवरात्र के 5वे दिन श्रीदुर्गाजी की तीसरी शक्ति महासरस्वती माता की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है तथा बोलचाल की भाषा में वसंत पंचमी के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। साधकजन 01 जुलाई  (बुधवार) को दशमी तिथि के प्रवेशोपरान्त व्रत तोड़ेगे। शास्त्रानुसार इस नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की भाँति पूजा-अर्चना करने का विधान है। प्रतिपदा यानी पहले दिन घट (कलश) स्थापना करने के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय माता जगदम्बा की पूजा-अर्चना करनी चाहिये तथा अष्टमी व नवमी तिथि को हवनोपरान्त कन्या भोज एवं पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिये। देवी भागवत के अनुसार जिस प्रकार वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और नवरात्री में श्रीदुर्गाजी की नौ रुपो यथा:- शैलपुत्री, ब्रहमचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माणडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्री, महागौरी तथा सिद्धदात्री माता की पूजा अर्चना की जाती है, ठीक उसी प्रकार से सभी नवरात्र में तंत्र विद्या के क्रम में दस महाविद्याओ की साधना की जाती है यथा:- श्रीकाली तारा महाविद्या षोडसी भुवनेश्वरी। भैरवी छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा।। श्रीबग्ला सिद्धिविद्या च मातंगी कमलात्मिका।। एता दशमहाविद्या: सिद्धि विद्या प्रकीर्तिता:।।

इस नवरात्रि में विशेषकर ज्ञान मार्ग, तंत्र मार्ग, शक्ति साधना, हनुमान जी व महाकाल आदि से संबंधित साधको के लिये विशेष महत्व रखती है। इस दरम्यान साधक बेहद कड़े नियम व हठ योग के साथ साधना करते हैं और दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैँ।
यहाँ यह बतलाना उचित प्रतीत हो रहा है कि बाबा-भागलपुर काली कुल और श्रीकुल के उपासक है यानी महाविद्यायों के साधक व तपस्वी है विगत 24 मार्च 2020 से अनवरत मौनव्रत साधना में है।  बाबा-भागलपुर की एक के बाद एक यानी अनेकानेक भविष्यवाणी शत-प्रतिशत सही साबित हुई और इतिहास के पन्ने में स्वर्णाक्षरों में तो अंकित हो गई लेकिन आज तक बिहार सरकार और केन्द्र सरकार का ध्यान इस ओर तो नहीं गया है।

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