हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला

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समाचार क्यारी चंडीगढ़ (राजेश कुमार )हरियाणा के साथ पूरे देश में बेगाने रहे विमुक्त, घुमंतू, अर्ध घुमंतू और टपरीवास समुदाय के साथ अपने रिश्ते को मनोहर सरकार ने और मजबूत कर लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पांच जातियों को घुमंतू, अर्ध घुमंतू जनजाति में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का यह कदम इन पांच जातियों को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक उत्थान देने की दिशा में काफी बड़ा माना जा रहा है।
सरकार के फैसले के बाद जोगी-जंगम-जोगी नाथ, मनियार, भाट, रहबारी और मदारी (हिंदू) भी घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में शामिल हो गए हैं। अब से पहले राज्य की विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में 24 जातियां थी, जो अब 29 हो गई हैं। ये सभी जातियां पिछड़ा वर्ग (क) में हैं। हरियाणा में 18 से 20 लाख की आबादी वाले विमुक्त, घुमंतु, अर्ध घुमंतू और टपरीवास समुदाय को समाज की मुख्यधारा में लाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2015 में तय किया था।
पहले पानीपत और इसके बाद फतेहाबाद में विमुक्ति दिवस सम्मेलन के माध्यम से घुमंतु, अर्ध घुमंतू समुदाय को एक मंच पर लाकर उनको पहचान देने की कवायद तेज की गई। उसके बाद इनकी समस्याओं को जानने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। मुख्यमंत्री ने हरियाणा विमुक्त, घुमंतु जाति विकास बोर्ड का गठन करते हुए डॉ. बलवान सिंह को इसका चेयरमैन नियुक्त किया हुआ है।
इसके बाद समिति ने डीएनटी कल्याण संघ के अध्यक्ष राजेश गोयल के साथ मिलकर क्रिड की रिपोर्ट और फील्ड में समुदाय की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद जोगी, जंगम, जोगी नाथ, मनियार, भाट, रैबारी और मदारी को शामिल करने की रिपोर्ट सरकार को 4 जुलाई 2018 को सौंपी थी।
बेदी समिति ने स्वीकार की रिपोर्ट की सिफारिशें
जैन समिति की रिपोर्ट की जांच पड़ताल के लिए सरकार ने राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अगुवाई में समिति गठित की थी। जिसने 5 दिसंबर 2018 और 13 फरवरी 2019 को बैठक कर कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार किया तथा इन्हें कैबिनेट में रखने की अनुशंसा कर दी। पूर्व में शामिल कुछ जातियों के पर्यायवाची नामों को भी संशोधन के तौर पर मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूर कर लिया है।
इसमें हेडी का पर्यायवाची नायक, अहेरिया, अहेरी व थोरी, बंगाली का बंगाले, बरड का बेरार व बुरार, बौथ्रया का बावरिया, बोरी व बावरी, गंधीला का गंधील व गंडोला, सांसी का कुचबंद, भेडकूट, गडरिया, रेचबंद, बेडिया, भांतू, भातू, छातू, बहेलिया, अहेरिया, पेरना, हबुरा, बादो, सिंगीकाट, सिंगीवाला, साढी, कंजर व पाखीवाडा, टेगस के तगा व तेगू, महातम का रायसिक्ख, धिनवासरा का धिनवार, मीना का मीणा, भौरा ब्राह्मण का भूरा ब्राह्मण, डेहा का डहया, डीया, डेह व ढैया, बंगाली का बंगाले, डूमना का डॅम, डोम, मिरासी, भंजरा व महाष्य, मल्लाह का केवट, बाजीगर का गवार, गवारिया, बंजारा व बादी, सेरगीर का सोरगर, हेंसी का हेसी व बेटा, गाडी लोहार का गाडिया लोहार, ओड का ओढ व ओड्ड, सिरकीबंद का भोपा, भोपे, मदारी, गवार, गवारिया, बंजारा, सिंगीकाट व डेहा, सपेला का सपेरा व नाथजोगी, सिकलीगर का बारिया, जोगी का जंगम, जोगी नाथ व योगी, रहबारी का रायका शामिल हैं।

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