वास्तविकता के पटल पर चीन का बहिष्कार ही देश मे नई क्रांति का आधार:-सुशील पंडित

यह तो स्पष्ट है कि भारत और चीन के सम्बंध बहुत अच्छे नही रहे हैं दोनों देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ही अभी तक व्यापारिक समझौतों को आधार बनाकर विश्व स्तरीय पंचायत में एक दूसरे के परस्पर बैठे दिखाई दे रहे थे। यदि इतिहास की बात की जाए तो चीन अपने सदैव दोगले आचरण के लिए विश्व प्रसिद्ध राष्ट्र की गिनती में आता है। 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध में भारत को पराजित होना पड़ा था क्योंकि तत्कालीन परिस्थितिया भारत के अनुकूल नहीं थी परंतु 1975 में इस दोमुंहे ड्रैगन ने पुनः फन उठाने का प्रयास किया जिसमें चीन को सैन्य शक्ति की हानि के साथ साथ भूगोलिक दृष्टि से भी पीछे हटना पड़ा था।अब वर्तमान2020 में चीन के द्वारा गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर किए गए हमले की निंदा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।

हमारे 20 जवान चीन की घिनौनी मानसिकता के कारण शहीद हो गए। 1962 के भारत और वर्तमान के भारत में जमीन और आसमान का अंतर है आज हम हर दृष्टि से मजबूत है मौजूदा सरकार के द्वारा भी जवानों के बलिदान को व्यर्थ न जाने देने वाली बात से भी यह प्रतीत होता है कि भारत चीन सीमा पर अब कुछ बदलाव हो सकता है परन्तु साथ ही साथ प्रतियेक भारतीय नागरिक के मन में यह भी सवाल उठ रहे है क्या अब चीनी वस्तुओं का बहिष्कार वास्तविक स्वरूप में किया जाएगा या फिर कुछ अंतराल के बाद हालात सामान्य होने पर पहले जैसा ही चलता रहेगा? वर्तमान में चीन और भारत में तनावपूर्ण स्थिति से देश की जनता के मन में राजनैतिक व व्यपारिक सम्बन्धों से कही बढ़कर राष्ट्रहित के मुद्दे की भावना हिलोरें ले रही है जहाँ देखो चीनी सामान का बहिष्कार करने की मुहिम जंगल में आग की तरह फैल गई है एक भारतीय होने के नाते यह होना स्वभाविक व समय की आवश्यकता है।

भारत चीन सीमा पर हुई हिंसक घटना से लोगों के द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भी चीनी सामान और चीन के द्वारा निर्मित सॉफ्टवेयर का बहिष्कार निरंतर जारी है।वर्तमान परिदृश्य पर यदि बात करें तो लोगों के इस आक्रोश से मौजूदा सरकार के द्वारा दिए गए नारा “आत्मनिर्भर भारत” को भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिल सकती है। परन्तु क्या हम में से कभी किसी ने यह विचार किया है कि भारत और चीन के द्विपक्षीय व्यपार सम्बन्धों के चलते हर भारतीय अपनी दिनचर्या में कुछ न कुछ चीनी वस्तु का प्रयोग न चाहते हुए भी कर रहा है।

हमारे घर के सामान से लेकर व्यवसाय से जुड़े सभी संसाधनों मोबाईल,लेबटॉप,अन्य चीजों में चीन मौजूद है। जो कि हम सब के लिए चिंतनीय विषय है। वर्तमान में चीन ने भारत में विदेशी निवेश के रूप में 6 अरब डॉलर से अपनी उपस्थिति दर्ज की हुई है। भारत में चीन की लगभग 75 कम्पनियों का धंधा जोरो पर है तकनीकी रूप से सक्षम होने का लाभ उठाते हुए इस क्षेत्र में चीन ने भारतीय बाजार पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

इस लेख के माध्यम से चीन के तकनीकी क्षेत्र की उपलब्धियों का महिमामंडन करना नहीं  अपितु हम कितने सक्षम है या और कितना हो सकते हैं इस पर ध्यान केंद्रित करना है किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए वहाँ की विदेशी निवेश निति महवपूर्ण भूमिका है परंतु वर्तमान में लागू की गई एफडीआई भी ज्यादा कारगर सिद्ध नही हुई।

कोरोना काल की इस संकट की घड़ी में सभी स्थानों पर प्राथमिक तौर पर हाइड्रोक्लोरोक्वीन का छिड़काव कोविड से बचने के लिए किया जा रहा है जिसके निर्यात में भारत का पूरे विश्व में एक अलग स्थान है अमेरिका ने भी कोरोना महामारी के संकट में इस वैक्सीन को कोविड19 की प्रतिरोधक के रूप में आयात किया और भारत की भूरि भूरि प्रशंसा भी की थी परन्तु इस दवाई को तैयार करने के लिए भी हमें चीन पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि इस दवा को बनाने के लिए कच्चा माल एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स(एपीआई) चीन से ही आयात किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार भारत में बनने वाली 100 में से 70 प्रतिशत एलोपैथिक दवाइयों में एपीआई भारतीय दवाई निर्माता कम्पनियां चीन से ही आयात कर रही है। जिसके चलते चीन प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का मुनाफा कमाने में लगा हुआ है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि यह सब कच्चा माल व अन्य चीनी सामान सस्ते दामों पर व सरल रूप में उपलब्ध हो रहा है जिसका लाभ अवसरवादी चीन कई दशकों से उठाया। देश आजाद होने से लेकर अब तक किस सरकार ने क्या किया या क्या करना चाहिए था यह विश्लेषण करना जरूरी हो सकता है परन्तु वर्तमान में इससे कहीं महत्वपूर्ण है कि अब हमें और हमारी सरकार को क्या करना चाहिए जिससे हम वास्तव में आत्मनिर्भर बन कर चीन जैसी दुराचारी शक्ति को मुँह तोड़ जवाब देने में सक्षम बन सकें।

क्योंकि किसी भी देश का अन्य किसी देश से व्यपार वहाँ की नीतियों के आचरण,राजनीतिक मन्तव्य,और उस राष्ट्र की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत या कमजोर है इन्हीं सब का वास्तविक आंकलन करने पर ही सफल व राष्ट्रहितैषी हो सकता है।वर्तमान की विषमताओं को देखते हुए हम सभी, सभी राजनैतिक दलों से ऊपर उठ कर देश हित सर्वोपरि मानते हुए चीन व चीन द्वारा निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार करने का सकारात्मक प्रयास करें क्योंकि चीन का बहिष्कार ही हमारे शहीदों का प्रतिकार होगा।

 सुशील पंडित पत्रकार

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