टीबी के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा कोरोना वायरस का अटैक

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नई दिल्ली। कोरोना देशभर में कहर बरपा रहा है। चिंताजनक यह है कि कोरोना के साथ-साथ अब टीबी का दोहरा अटैक भी देखा जा रहा है। फेफडे़ पर इन दो बीमारियों का एक साथ अटैक मरीज के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। एम्स में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें बहुत प्रयास के बावजूद दो बीमारियों से पीड़ित 38 वर्षीय युवा मरीज को डॉक्टर बचा नहीं पाए। एम्स ने इस केस स्टडी को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल (जर्नल ऑफ इंफेक्शन) में प्रकाशित किया है। साथ ही चिकिसा जगत को सलाह दी है कि कोरोना से पीडित मरीज की बीमारी ठीक होने में ज्यादा समय लगे तो कोविड के साथ टीबी होने की आशंका के बारे में जरूर सोचें।

दिल्ली में कोरोना के साथ टीबी के संक्रमण होने का एकमात्र मामला नहीं है। लोकनायक अस्पताल में भी कोरोना के साथ टीबी के संक्रमण से पीड़ित 8-10 मरीज सामने आ चुके हैं। डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना के साथ टीबी होने पर मरीजों को बचा पाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। बहरहाल, एम्स द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि युवक को अस्पताल लाया गया तो उसे हल्का बुखार, करीब 15 दिन से सांस लेने में परेशानी, खांसी की समस्या थी। ब्लड प्रेशर व शरीर में ऑक्सीजन का स्तर (84 फीसद) भी कम हो गया था व सांस लेने की गति तेज थी। उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन वह किसी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके कारण कोरोना का संक्रमण हुआ।
आरटी-पीसीआर जांच में उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई। उन्हें ऑक्सीजन, हाइड्रोऑक्सीज क्लोरोक्वीन व एंटीबायोटिक दवा दी गई, फिर भी स्वास्थ्य में खास सुधार नहीं हुआ। इस वजह से डॉक्टरों ने टीबी की जांच के लिए बलगम का सैंपल भेजा और टीबी की दवाएं भी शुरू की। स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट होने के कारण मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। इसके बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका। मौत के बाद टीबी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

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