अपने दूसरे कार्यकाल में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को देश भर में पहुंचाएगी मोदी सरकार

नई दिल्ली , मुकेश अग्रवाल:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग की पिछली सरकार के दौरान जहां आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) शुरू कर लोक स्वास्थ्य के लिहाज से एक अहम कदम उठाया गया था, अपने दूसरे कार्यकाल में अब मोदी सरकार ने वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को देश भर में निचले स्तर तक पहुंचाने के लिहाज से एक बड़ी पहल की है। खास कर मधुमेह और मोटापे जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण के लिहाज से यह काफी अहम साबित होगा।
केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपाद नाइक ने कहा, ‘‘देश भर में खोले जा रहे सभी आरोग्य केंद्रों में एलोपैथिक डॉक्टरों के साथ ही अब आयुर्वेदिक और होमियोपैथिक आदि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। ऐसे उपायों के जरिए लोगों को वैकल्पिक चिकित्सा का लाभ मिल सकेगा।’’
देश भर में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (पीएचसी) के स्तर पर भी आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति पर अब सरकार ने गंभीर पहल की जा रही है। वर्ष 2016 में देश के तीन अलग-अलग राज्यों के तीन जिलों में पायलट परियोजना के तहत आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इनमें राजस्थान का भीलवाड़ा, गुजरात का सुरेंद्रनगर और बिहार का गया जिला शामिल था। इन जिलों में गैर संक्रामक रोगों के मरीजों को अब आयुर्वेदिक दवा, योग और प्राकृतिक चिकित्सा का विकल्प उपलब्ध करवाया जा रहा है।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की ओर से आयुर्वेदिक फार्मूले के आधार पर मधुमेह के इलाज के लिए विकसित की गई नई दवा बीजीआर- 34 भी इस संबंध में काफी अहम भूमिका निभा रही है। सीएसआईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘‘यह वैज्ञानिक तरीके से विकसित की गई दवा है जिसका कई स्तर पर परीक्षण किया जा चुका है और इसे मधुमेह के नियंत्रण में काफी उपयोगी पाया गया है।’’
राज्य सभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में पिछले दिनों नाइक ने कहा था कि सीएसआईआर की दो प्रयोगशालाओं ‘सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एंड एरोमैटिक प्लांट्स’ (सीआईएमएपी) और ‘नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट’ (एनबीआरआई) ने मिल कर इसे विकसित किया है। प्री-क्लीनिकल अध्ययन के आधार पर विकसित की गई बीजीआर- 34 का उपयोग उन मरीजों में मधुमेह के प्रबंधन के लिए किया जाता है, जिनमें हाल ही में इस बीमारी का पता चला हो।
सीएसआईआर की विकसित इस दवा को दिल्ली की एमिल फार्मेसी नाम की कंपनी ने बाजार में उतारा है। एमिल के संचित शर्मा कहते हैं कि बीजीआर-34 में प्राकृतिक डीपीपी-4 होता है जिसका कोई साइड इफेक्ट या दुष्प्रभाव नहीं है। डीपीपी-4 आधारित इस दवा का उपयोग टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों में रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करने के लिए किया जाता है।
आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि जीवन शैली पर आधारित बीमारियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मंत्रालय ने देश भर में 12,500 स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की पहचान की है जहां आयुष सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। बीमारियों से बचाव के लिहाज से भी इसका लाभ मिल सकेगा।

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