पंजाब, हरियाणा से दिल्ली में फंसा गठबंधन का पेंच

नई दिल्ली : गठबंधन को लेकर शुक्रवार को ​कांग्रेस पार्टी में बैठकों का दौर चला, लेकिन नतीजा क्या निकला यह तो आने वाले कुछ दिन बताएंगे। चर्चा दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) से गठबंधन को लेकर हुई, लेकिन दिल्ली के गठबंधन में पेंच पंजाब और ​हरियाणा का फंसा हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि यह पेंच जल्द निकाल दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अ​मरिंदर सिंह ने राहुल गांधी से मुलाकात की। उसके बाद पीसी चाको और शीला दीक्षित की बैठक राहुल गांधी के साथ हुई। इसमें यह तो तय हो गया है कि दिल्ली में 4-3 के फार्मूले पर आप और कांग्रेस चुनाव लड़ेंगे।

लेकिन पंजाब और हरियाणा में क्या स्थिति होगी, इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई। बाद में रणदीप सुरजेवाला ने कह दिया कि आलाकमान का फैसला सबको बता दिया जाएगा। उनके इस वक्तव्य से साफ है कि हरियाणा और पंजाब में भी आप पार्टी के साथ गठबंधन संभव है। गौरतलब है कि आप पार्टी पंजाब में एक सीट और हरियाणा में तीन सीट की डिमांड किए हुए हैं, लेकिन पंजाब में अमरिंदर सिंह ने साफ मना कर रखा है कि वह आप के साथ गठबंधन में पक्ष में नहीं है। ऐसे हरियाणा में प्रदेश यूनिट आप के साथ गठबंधन के विरोध में खड़ा है। प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के साथ भूपेन्द्र हुड्डा और दिपेन्द्र हुड्डा आप पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ है।

लेकिन इधर दिल्ली में गठबंधन को लेकर जिस तरह का माहौल है। उसको देखते हुए माना जा रहा है कि गठबंधन तो जरूर होगा, लेकिन किस स्थिति में होगा, इसकी तस्वीर साफ नहीं है। दूसरी तरफ आप पार्टी के नेता कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए रोज नए शगूफे छोड़ रही है। शुक्रवार को खबर मिली कि आप पार्टी ने कहा कि वह ​हरियाणा में गुड़गांव, फरीदाबाद और करनाल की सीट चाहते हैं, अगर कांग्रेस नहीं मानेगी तो वह दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

आप पार्टी ने साथ में एक सर्वे भी दिखा दिया है जिसमें कहा गया है कि आप पार्टी सातों सीट पर मजबूत है और चुनाव में भाजपा को हरा देगी। वास्तव में आप पार्टी इस तरह के शगूफे छोड़ कर कांग्रेस पर लगातार दबाव बना रही है कि गठबंधन हो तो पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में एक साथ हो। जहां तक सवाल दिल्ली का है तो दिल्ली में कांग्रेस के हिस्से नई दिल्ली, चांदनी चौक और उत्तर-पश्चिमी सीट आएगी। सूत्रों का कहना है कि पीसी चाको, शीला दीक्षित और राहुल गांधी की बैठक के बाद आप पार्टी के साथ गठबंधन की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो चुकी है।

तो गठबंधन ‘आप’ की शर्तों पर होगा…
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए आप पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन का मामला दिन-प्रतिदिन पेचीदा होता जा रहा है। अब आप ने गठबंधन के लिए कांग्रेस के सामने दो नई शर्तें रख दी हैं। पहली शर्त के अनुसार आप दिल्ली में कांग्रेस के साथ तभी गठबंधन करेगी जब कांग्रेस हरियाणा और चंडीगढ़ में भी आप के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए राजी होगी।

दूसरी शर्त के अनुसार आप ने कांग्रेस से कहा है कि वह उसके साथ तभी गठबंधन करेगी जब वह दिल्ली के लिए पूर्णराज्य के समर्थन की घोषणा खुले तौर पर करे। जिसमें कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तय की गईं दो पूर्व शतों पर सहमति जताई गई। जिसमें पहली शर्त यह है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन केवल तभी संभव है जब कांग्रेस दिल्ली की सातों सीटों के साथ-साथ हरियाणा की 10 चंडीगढ़ की एक लोकसभा सीट पर भी गठबंधन करने काे तैयार हो।

इसके साथ ही आप ने कांग्रेस को यह भी सूचित किया है कि वह चंडीगढ़ में कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन कर देगी। कांग्रेस की ओर दिल्ली में आप को चार सीटें देने के प्रस्ताव की चर्चा पर आप सूत्रों ने कहा कि यदि कांग्रेस दिल्ली में तीन सीटें लेती है उसे हरियाणा में तीन सीटें आप को देनी होंगी। ये सीटें फरीदाबाद, गुरुग्राम और करनाल शामिल हैं।

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