अवमानना मामले में तीन साल बाद सामने आई विजय माल्या की याचिका

नई दिल्ली. भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही रजिस्ट्री से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि पूछा है कि मई 2017 के आदेश के खिलाफ माल्या की अपील अदालत के सामने लिस्ट क्यों नहीं की गई? कोर्ट ने अपील को को तीन साल बाद लिस्‍ट किए जाने पर कड़ी फटकार लगाई। मामले में कोर्ट ने रजिस्ट्री से रजिस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का नाम भी पूछा है। माल्या की पुनर्विचार याचिका पर जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने गौर किया। पीठ ने आदेश दिया कि रजिस्ट्री अपना जवाब दो हफ्ते में दे।

क्या है मामला? 
माल्या ने 2017 के उस फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दाखिल की है जिसमें उन्हें संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप है। चार करोड़ अमेरिकी डॉलर की रकम माल्या के बच्चों के खाते में ट्रांसफर किए जाने के मामले में माल्या को अवमानना का दोषी ठहराया था। यब याचिका स्टेट बैंग ऑफ इंडिया (एसबीआई) के अगुवाई में एक कंसोर्टियम ने दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में माल्‍या की ओर से पुर्नविचार याचिका तय समय में दाखिल की गई थी, लेकिन इसको तीन साल तक कोर्ट में लिस्ट नहीं किया गया।

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