महात्मा गांधी की जीवनशैली ने कोई कार्बन फुटप्रिंट नहीं छोड़ा, दनिया के लिए एक सबक : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का सामना कर रही दुनिया के लिए महात्मा गांधी की जीवनशैली एक महत्वपूर्ण सबक है। दरअसल, उन्होंने ऐसा जीवन जिया जिसने कोई ‘‘कार्बन फुटप्रिंट’’ नहीं छोड़ा। महात्मा गांधी की एक प्रतिमा का यहां प्रख्यात योनसेई विश्वविद्यालय में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई-इन और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून के साथ अनावरण करने के दौरान मोदी ने कहा कि 20 वीं सदी में महात्मा गांधी शायद मानव जाति को सबसे बड़ा तोहफा थे। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘पिछली सदी में अपनी शख्सियत, अपने जीवन एवं मूल्यों के जरिए महात्मा गांधी ने हमें दिखाया कि भविष्य क्या होगा। वह कहा करते थे कि मेरा जीवन मेरी सीख है।’’ मोदी दो दिनों की यात्रा पर बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे।

 

उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी कहा करते थे कि ईश्वर और प्रकृति ने मानव की जरूरत को पूरा करने के लिए हर चीज दी है लेकिन लालच के लिए नहीं दी है। यदि हम अपने लालच को संतुष्ट करना चाहते हैं तो प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त नहीं होंगे। वह कहा करते थे कि हमारा जीवन जरूरत आधारित होना चाहिए, ना कि लालच आधारित। ’’मोदी ने कहा कि आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन वह दो बड़ी चुनौतियां हैं जिसका मानव जाति सामना कर रही है । वहीं, महात्मा गांधी की शिक्षाएं दुनिया को इन दोनों मुद्दों का हल करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी के जीवनकाल में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई लेकिन उन्होंने ऐसा जीवन जिया जिसने कोई कार्बन फुटप्रिंट नहीं छोड़ा। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित ग्रह (पृथ्वी) छोड़ना महत्वपूर्ण है।’’गौरतलब है कि ‘‘कार्बन फुटप्रिंट’’ को किसी व्यक्ति, संगठन या उत्पाद द्वारा किए गए कार्बन डाइऑक्साइड के कुल उत्सर्जन के रूप में परिभाषित किया जाता है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘गांधी कहा करते थे कि हमें भावी पीढ़ी से प्राकृतिक संसाधनों को छीनने का कोई अधिकार नहीं है। हम उनके लिए एक बेहतर दुनिया छोड़ सकते हैं ताकि वे स्वच्छ हवा में सांस ले सकें, स्वच्छ जल प्राप्त कर सकें। ’’मोदी राष्ट्रपति मून जेई – इन के न्यौते पर दक्षिण कोरिया की यात्रा पर हैं। 2015 से उनकी दक्षिण कोरिया की यह दूसरी यात्रा और राष्ट्रपति मून जेई – इन के साथ दूसरी बैठक है। महात्मा गांधी की प्रतिमा के अनावरण के बाद प्रधानमंत्री दक्षिण कोरियाई शहर गिमहाई के मेयर से मिले और दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों को प्रदर्शित करते हुए उन्हें बोधि वृक्ष का एक पौधा उपहार में दिया। अयोध्या और गिमहाई को सिस्टर सिटी के रूप में विकसित करने के लिए 2000 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे

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