मजदूर जा रहे हैं घर ,57% उद्योग इसलिए नहीं चल पा रहे क्योंकि श्रमिक नहीं

पानीपत. लॉकडाउन के दिन बढ़ते गए और आखिरी धेला भी खर्च हो गया। अब न काम है, न पैसा। रोटी के लिए भी सरकार का सहारा है। ऐसे में अब उन लोगों ने भी घरों की ओर कदम बढ़ा दिया है, जो पहले रुकना चाहते थे। जबकि कामगारों के आभाव में फैक्ट्रियां अनुमति के बावजूद चल नहीं पा रही हैं। ये81 दोनों कड़ियां जुड़नी चाहिए। सरकार ने माना है कि ये हमारे अपने लोग हैं और प्रदेश के विकास में इनका भी योगदान है। ऐसे में इन्हें समझाकर रोकने की या वापस बुलाने की व्यवस्था भी जरूरी है, क्योंकि जहां ये जाना चाह रहे हैं वहां पहले से अभाव है। हमारे यहां धान की रोपाई भी शुरू होनी है जिसमें 70 हजार से अधिक श्रमिकों की जरूरत पड़ेगी।

मजदूर कह रहे- काम नहीं, इसलिए जाना मजबूरी

लॉकडाउन के चलते उद्योग धंधे बंद हुए 50 दिन से अधिक हो चुके हैं। अब न तो कोई श्रमिकों को मदद करने वाला है और न ही यह भरोसा ही दिला पा रहा है कि रुक जाओ काम मिलेगा। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद श्रमिक घरों की ओर रुख कर रहे हैं। कोरोना को लेकर गांव में रह रहे परिवारों भी चिंता में हैं। यूपी के लोगों को बसों से भेजा रहा है। वहां भी क्वारेंटाइन सेंटर्स फुल हैं। हाल ही में हरियाणा से सहारनपुर भेजी गईं श्रमिकों से भरी रोडवेज की कई दर्जन बसें लौटा दी गईंं। बिहार व मध्यप्रदेश के श्रमिकों को स्पेशल ट्रेनों से भेजा जा रहा है। इसके लिए बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रमिक साइकिल या पैदल ही रवाना हो रहे हैं। ऐसे ही 22 लोग साइकिल और रिक्शे से फरीदाबाद और पलवल तक पहुंचे। इन्हें 1500 किलोमीटर दूर बिहार के समस्तीपुर जाना है। ये हर रोज करीब 100 किमी चलते हैं। मंगलवार को श्रमिक पलवल-आल्हापुर फ्लाईओवर के पास पेड़ के नीचे आराम फरमाते नजर आए। जीवन यादव, मिथिलेश पासवान, अमरेश यादव, मुनेश्वर यादव आदि श्रमिक कहते हैं कि कामकाज बंद हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद प्रशासन ने 8-9 दिन खाना उपलब्ध कराया। अब मदद भी कम ही मिल रही है।

काम देने को तैयार 57 हजार उद्योग पर चल नहीं पा रहे क्योंकि श्रमिक नहीं हैं

राज्य सरकार का दावा है कि राज्य में एक लाख में से 47000 इंडस्ट्रियां शुरू हो चुकी हैं। 57000 को जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके लिए लॉकडाउन के नियमों में भी ढील दी गई है। इंडस्ट्रियां भी सहूलियत और सुविधाओं के साथ मजदूरों के इंतजार में हैं, ताकि उद्योग का चक्का फिर से तेज गति से दौड़े। पानीपत की छोटी-बड़ी 3000 यूनिट बंद पड़ी हैं। इसमें कंबल प्लांट, स्पिनिंग मिल और एक्सपोर्ट हाउस प्रमुख हैं। जो इंडस्ट्रीज चल भी रही हंै, वह क्षमता की 30 से 50 फीसदी चल रही हैं, क्योंकि वर्कर नहीं हैं। हरियाणा चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन विनोद खंडेलवाल ने कहा कि लेबर को सरकार ही रोक पाएगी। पानीपत में आज सिर्फ 1 लाख लेबर हैं, 3 लाख जा चुके हैं।

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