सोनीपत शराब घोटाले में शराब तस्करी के मामले का सच अब तीन मोबाइल में दर्ज नंबर खोलेंगे

मुख्य आरोपी भूपेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के लिए देर रात दो बजे हरियाणा पुलिस की जॉइंट टीम ने उसके चंडीगढ़ स्थित आवास पर दबिश दी। परंतु वह बच निकलने में कामयाब हो गया। हालांकि उसके घर से तीन मोबाइल पुलिस के हाथ लगे हैं। इन मोबाइल नंबरों को अब पुलिस खंगालेगी, जिनसे पता लगेगा कि उसका किन लोगों से संपर्क था। पिछले कुछ दिनों में किस-किस से उसकी बात हुई है। क्योंकि इस मामले में कई बड़े प्रभावशाली लोगों के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। भूपेंद्र सिंह के तार हरियाणा सचिवालय तक जुड़े हुए हैं। सामने आया है कि वह यहां पर अक्सर अधिकारियों और अन्य लोगों से भी मुलाकात किया करता था। इसलिए सरकार की एसआईटी से पहले रोहतक आईजी संदीप खिरवार  ने वहां के एसपी राहुल शर्मा के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर पहले ही जांच शुरू कर दी है। भूपेंद्र सिंह के खिलाफ शराब तस्करी के दो जिलों में 11 मामले दर्ज हैं।

97 लाख नकद व पिस्टल मिली

चंडीगढ़ में भूपेंद्र की गिरफ्तारी के लिए दी गई दबिश के दौरान वहां से 97 लाख रुपए मिले हैं। इसके अलावा 2 पिस्टल मिली है। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस की दबिश रात दो बजे हुई और इससे पहले भूपेंद्र कैसे निकल गया। खुद गृहमंत्री अनिल विज भी यह कह रहे हैं कि यह सोचने वाली बात है।

सोनीपत में पुलिस के साथ आबकारी विभाग का भी गोदाम था। उसमें से भी शराब गायब हुई है। आबकारी विभाग की ओर से अब पुलिस को शिकायत दी गई है। जिसे पुलिस गोदाम के मामले से जुड़ी एफआईआर में ही शामिल कर लिया गया है।

जिससे 1 साल पहले शराब पकड़ी, भूपेंद्र के गोदाम में ही रखी

हरियाणा पुलिस कैसे काम कर रही है, इसका बड़ा उदाहरण शराब घोटाले में ही सामने आया है। सोनीपत जिले की खरखौदा पुलिस की ओर से 6 मई को दर्ज की गई एफआईआर का दैनिक भास्कर ने गहनता अध्ययन किया तो सामने आया कि पुलिस ने जिस गाेदाम में शराब रखी हुई थी, भूपेंद्र सिंह  और उसके गांव सिसाना से जुड़े लोगों से बरामद ही शराब थी। यानि पुलिस ने जिससे अवैध शराब पकड़ी, उसी के गोदाम में उसे सुरक्षित समझकर रख दिया। यह गोदाम भूपेंद्र सिंह की माता के नाम है।

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