जातीय जनगणना का मुद्दा बिहार के बाद महाराष्ट्र में गर्म

विधानसभा के स्पीकर नाना पटोले के निर्देश के बाद के गृह मंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को विधानसभा में ये घोषणा की. राज्य विधानसभा ने आठ जनवरी को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग की थी.

जब कांग्रेस के विधायक विकास ठाकरे ने इस प्रस्ताव पर केंद्र की प्रतिक्रिया के बारे में विधानसभा में पूछा तो स्पीकर नाना पटोले ने बताया कि केंद्र सरकार ने विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है.

नाना पटोले ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर विवेक जोशी का जवाब सदन के सामने रखा, “अन्य पिछड़ा, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग, अन्य जातियों, आदि के आंकड़े इकट्ठा करने से जनगणना के कार्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा.”

विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “इस मसले पर केंद्र के स्तर पर एक नीतिगत निर्णय लिए जाने की ज़रूरत है. बीजेपी भी इस मांग को लेकर सकारात्मक है. अगर हम सब मिलकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे तो मुझे यक़ीन है कि हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे.”

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