लापरवाही / परिजन ने अस्पताल प्रशासन से लगाई गुहार, तब मिली रिपोर्ट

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के चलते अब दिल्ली में किसी मरीज की मौत हो जाती है, तो उसका शव लेने के लिए परिवार को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल में सामने आया है। परिवार को एक बुजुर्ग का शव उन्हें 19वें दिन मिला। खेड़ा खुर्द गांव में रहने वाले नवीन ने बताया कि 25 अप्रैल की शाम करीब 8 बजे उनके रिश्तेदारी में रहने वाले एक बुजुर्ग सूबेदार सिंह (65) को आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया था।डॉक्टरों ने परिवार को बताया था कि उनको कुछ कोरोना के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं, जिससे टेस्ट करवाना होगा। रिपोर्ट आने के बाद ही शव को दिया जाएगा। परिवार ने डॉक्टरों की बात को मान लिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इनका सैंपल दिल्ली की एक लैब में भेजा गया था। उस दिन 8 सैंपल इस अस्पताल से भेजे गए, जिनमें से 7 का रिजल्ट आ गया। लेकिन इस बुजुर्ग की रिपोर्ट पर रिपीट सैंपल आ गया। अब दोबारा इनका सैंपल भेजा जाना था। अस्पताल प्रशासन ने इनका सैंपल दोबारा भेजा तो इस लेब के स्लॉट फुल मिले और कहा गया कि यहां जांच फिलहाल नहीं हो पाएगी।
लैब का जवाब आने के बाद फिर से 7 मई को सैंपल नोएडा के बायोलॉजिकल इंस्टिट्यूट में भेजा गया। इसी बीच सरकारी आदेश आ गया था कि नोएडा की इस लैब में दिल्ली के सैंपल की जांच नहीं होगी और 11 मई को वह सैंपल नोएडा से वापिस बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल आ गया। इसके बाद उसी दिन फिर से सैंपल दिल्ली की लैब में भेजा गया है और आज या कल में इसकी रिपोर्ट आने की बात कही गई। काफी परेशान होने के बाद परिजनों की प्रशासन से गुहार लगाई कि उनके बुजुर्ग का 8 आठ बजे अस्पताल से एमएस कोहली नामक अधिकारी ने फोन पर मैसेज किया। जिसमें लिखा था कि टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। आप शव को मोर्चरी से ले जा सकते हैं। गुरुवार को उन्होंने शव लिया। घर के दरवाजे पर दो से तीन मिनट तक एंबुलेंस से ही शव को परिवार वालों को दिखाया गया। गांव के श्मशान घाट में परिवार के 4 लोगों ने जाकर पूरी सोशल डिस्टेंसिंग और ग्लव्स पहनकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

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