घर जाने के लिए सुबह सात बजे ही पहुंचे गए थे प्रवासी, काम धंधा बंद

चंडीगढ़. लाॅकडाउन में छूट के बाद प्रवासी गांव जाने के लिए तपती धूप में 6 से 7 घंटे इंतजार रहे हैं। सोमवार को रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी उन्हें ट्रेन में बैठने के लिए भूखे प्यासे परिवार के साथ घंटाें इंतजार करना पड़ा। इनका कहना था कि ट्रेन जा रही है, फाेन भी आया है, लेकिन बार-बार अनांउस किया जा रहा है जहां पर बैठे हैं वहीं बैठे रहें। जब बुलाया न जाए तब तक लाइन में ही लग रहें। ट्रेन भले ही लखनऊ के लिए दाेपहर 3 बजे जानी थी, लेकिन परिवार के साथ सामान बांधकर सुबह 7 बजे ही प्रवासी पंहुच गए थे।

मदद: फटा कपड़ा पहना था, पुलिस ने दिया मास्क 

मंगलवार को ट्रेन से घर जाने के लिए परिवार के साथ पहुंचे एक बच्चे ने सुरक्षा के लिए मुंह पर फटा हुआ कपड़ा पहन रखा था। इस बच्चे पर पुलिस की नजर पड़ी तो एक मुलाजिम ने बच्चे को मास्क पहनाया।

तपती सड़क पर नंगे पैर दादी के साथ दौड़ रही थी खुशी

लाॅकडाउन खुलने के बाद भी शहर काे छाेड़कर जाने की मजबूरी ऐसी की 6 घंटे तपती धूप भी महसूस नहीं हुई। सिर पर कपड़ों की गठड़ी उठाए दादी मुनि देवी के साथ तीन साल की खुशी नंगे पैर सड़क पर दौड़े जा रही थी। खुशी ठीक से बाेल भी नहीं पाई लेकिन कहा-गांव जाना है।

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