भारत को मिल रहा है शक्तिशाली देशों का समर्थन

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नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ तनातनी के बीच भारत के वैश्विक समर्थन में लगातार इजाफा हो रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के बाद अब जापान ने भी सीमा विवाद पर भारत को अपना मजबूत समर्थन मिला है। जापान ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह चीन द्वारा एलएसी पर यथास्थिति को बदलने के लिए एकपक्षीय प्रयास का विरोध करेगा। विदेश सचिव हर्ष वी श्रृंगला और भारत में जापान के राजदूत सतोशी सुजुकी के बीच शुक्रवार सुबह फोन पर बातचीत के दौरान इस मामले पर चर्चा हुई। भारत ने जापान के साथ अमेरिका, फ्रांस, रूस और जर्मनी को एलएसी पर तनाव की ताजा स्थिति की जानकारी दी है।

भारत लगातार अपने मित्र व प्रभावी देशों को एलएसी की स्थिति के बारे में लगातार पर अपडेट कर रहा है। ज्यादातर देशों की ओर से भारत को सीमा विवाद पर समर्थन मिला है। जापान ने कहा, ‘शांतिपूर्ण समाधान को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार की नीति सहित एलएसी के साथ स्थिति पर उनकी जानकारी की सराहना करता है। जापान संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद भी करता है। साथ ही जापान ने यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध किया है।’

अमेरिका: व्हाइट हाउस ने बुधवार को चीन के भारत के साथ चल रहे सीमा टकराव पर तीखी टिप्पणियों में चीन की ‘आक्रामकता’ को दोषी ठहराया है। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव Kayleigh McEnany ने दैनिक ब्रीफिंग में राष्ट्रपति को कोट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर ड्रैगन का आक्रामक रुख दुनिया के अन्य हिस्सों में चीनी आक्रामकता के एक बड़े पैटर्न के साथ फिट बैठता है और ये कार्रवाई चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि करता है। व्हाइट हाउस ने 15 जून की हिंसक झड़पों के बाद कहा था कि वह स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है।

फ्रांस: फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैली ने 29 जून को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखकर गलवान घाटी में 20 भारतीयों की शहादत पर शोक व्यक्त किया। फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने पत्र में लिखा, “यह सैनिकों, उनके परिवारों और राष्ट्र के खिलाफ एक हमला था। इन कठिन परिस्थितियों में मैं फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के साथ अपने दृढ़ और मैत्रीपूर्ण समर्थन को व्यक्त करना चाहती हूं।” इस बात को याद करते हुए कि भारत, फ्रांस का रणनीतिक साझेदार है, रक्षा मंत्री पार्ली ने अपने देश की गहरी एकजुटता को दोहराया।

जापान: भारत को जापान की तरफ से चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) विवाद पर मजबूत समर्थन मिला है। जापान ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के लिए एकपक्षीय प्रयास का विरोध करेगा। विदेश सचिव हर्ष वी श्रृंगला और भारत में जापान के राजदूत सतोशी सुजुकी के बीच शुक्रवार (3 जुलाई) सुबह फोन पर बातचीत के दौरान इस मामले पर चर्चा हुई।

ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बीते एक जुलाई को कहा कि आगामी दशक में देश की रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण के लिए 270 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निवेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक तेवरों को देखते हुए किसी भी प्रकार के “आक्रमण” को रोकने या जवाबी कार्रवाई करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती हुई चुनौतियों का अर्थ है कि हमें नया तरीका अपनाना होगा जिनसे उन गतिविधियों को रोका जा सके जो हमारे हितों के विपरीत हों।” मॉरिसन ने कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तनाव का केंद्र बन चुका है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन का बढ़ता सैन्य और आर्थिक प्रभाव क्षेत्र के विभिन्न देशों के लिए चिंता का विषय है।

आसियान: दक्षिणपूर्व एशियाई (आसियान) देशों ने दक्षिण चीन सागर में आक्रामक गतिविधियों को लेकर चीन को चेताया है। ऑनलाइन आसियान सम्मेलन में 26 जून को एकजुटता दिखाते हुए वियतनाम और फिलीपींस ने कहा कि कोविड-19 के संकट के दौरान कोई भी देश दक्षिण चीन सागर में खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा न दे। वियतनाम और फिलीपींस विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की एकतरफा कार्रवाई कर द्वीपों पर नियंत्रण की कोशिश को लेकर पहले ही विरोध दर्ज करा चुके हैं।

ब्रिटेन: हांगकांग में सुरक्षा कानून लागू होमे के बाद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां हांगकांग में लोग सड़कों पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कई देश चीन की आलोचना कर रहे हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चीन पर समझौते के उल्लंघ्न का आरोप लगाते हुए हांगकांग के लोगों को ब्रिटेन की नागरिकता देने की कोशिश की। इसपर चीन ने पलटवार करते हए कहा कि यूके को हांगकांग के लोगों को नागरिकता देने का कोई अधिकार नहीं। चीन ने कहा कि वो ब्रिटेन को हांगकांग के लोगों को नागरिकता नहीं देने देंगे और इसके लिए कड़े कदम उठाएंगे।

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