विश्व महासागर दिवस : जानें इस दिन के महत्व और इतिहास

पृथ्वी का दो तिहाई हिस्सा जलीय होने के बावजूद भी यहां शुद्ध पानी की मात्रा बहुत ही कम है। वायु और जल ही पृथ्वी पर जीवन का आधार है। समुद्र से घिरे होने की वजह से ही पृथ्वी को वाटर प्लैनेट (Water Planet) भी कहा जाता है। लेकिन अब इसका अस्तित्व खतरे में है। इसी के मद्देनजर महासागरों के महत्व, इसमें बढ़ रहे प्रदूषण, उसके खतरों और समंदर के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फेलाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 8 जून को विश्व महासागर दिवस (World Oceans Day) यानी विश्व समुद्र दिवस मनाया जाता है।

कैसे हुई इसकी शुरुआत?

क्यों मनाया जाता है यह दिन?

हर साल इस दिन को मनाए जाने के पीछे का मकसद महासागरों के महत्व से लोगों को अवगत कराना है कि कैसे महासागर खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता, परिस्थिति संतुलन जैसी चीजों में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। देशों के विकास के साथ ही महासागरों के दूषित होने की गति भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। महासागरों में गिरने वाले प्लास्टिक प्रदूषण के वजह से महासागर धीरे-धीरे गंदे होते जा रहे हैं। इससे समुद्री जीवों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वे गलती से प्लास्टिक को अपना भोजन समझ लेते हैं जिससे उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। जो बहुत ही दुखद है

विश्व महासागर दिवस का महत्व

दुनिया की करीब 30 फीसदी आबादी तटीय इलाकों में रहती है और उनका जनजीवन पूरी तरह इसी पर निर्भर है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करने में महासागरों का योगदान किसी से छिपा नही है। विशाल महासागर से पेट्रोलियम के साथ ही अनेक संसाधन भी प्राप्त होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, तकरीबन 10 लाख जीवों की प्रजातियों का घर समंदर हैं। इसके अलावा मौसम में आनेवाले बदलाव और जलवायु परिवर्तन की जानकारी प्रदान करने में भी महासागरों का अहम योगदान होता है, इसलिए इनका संरक्षण करना हम में से हर एक की जिम्मेदारी है।

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