ताऊ देवीलाल के इस गढ़ को एक-एक बार ढहा चुके हैं कांग्रेस-बीजेपी

नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए जहां हर सीट का अपना खासा महत्व है वहीं बादली विधानसभा  पर हर एक राजनीतिक दल की निगाह है. कहा तो यह जाता है कि सियासत के ताऊ देवीलाल  के परिवार की जब तक इस सीट पर निगाह रही तो यहां से चौधरी धीरपाल  को कोई टक्कर नहीं दे पाया. लेकिन बीते दो चुनावों की बात करें तो बीजेपी  और कांग्रेस  एक-एक बार ताऊ परिवार के इस गढ़ को ढहा चुके हैं.

2014 के विधानसभा चुनाव में बादली सीट से बीजेपी के ओमप्रकाश धनखड़ ने जीत दर्ज की थी. ओपी धनखड़ राष्ट्रीय किसान मोर्चा के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं. धनखड़ भाजपा हिमाचल प्रदेश के पार्टी प्रभारी भी रह चुके हैं. 1978 में आरएसएस की गतिविधियों से जुड़ने के बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी सक्रिय रहे थे. 2014 के चुनाव परिणाम में ओमप्रकाश धनखड़ (बीजेपी) 41549, कुलदीप वत्स (निर्दलीय) 32283, सुमित्रा धीरपाल सिंह (इनेलो) 16594, नरेश कुमार (कांग्रेस) 14452 वोट मिले थे.

1977 से वजूद में आई बादली विधानसभा में अब तक 9 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. पहली बार यहां से चौधरी हरद्वारी लाल जीते थे. लेकिन उसके बाद बादली एक तरह से चौधरी धीरपाल की होकर रह गई . उन्होंने 5 बार लगातार इस सीट पर जीत का परचम लहराया. इतना ही नहीं पांच बार की जीत में चार बार पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौधरी मनफूल सिंह को हराया.

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