फैसला देते समय कोर्ट बहुधर्म और बहुसांस्कृतिक मूल्यों को कायम रखे

 नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक का दावा कर रहे छह मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में मोल्डिंग ऑफ रिलीफ यानी वैकल्पिक राहत पर पक्ष रखते हुए कहा है कि फैसला कुछ भी हो इसका असर भावी पीढि़यों और देश की राजनीति पर पड़ेगा। कोर्ट विवाद का हल निकालते समय बहुधर्म और बहु सांस्कृतिक मूल्यों को कायम रखे। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट को संविधान का प्रहरी बताते हुए कहा है कि वैकल्पिक राहत पर विचार करते समय इसका भी अवश्य ख्याल रखा जाए कि आने वाली पीढि़यां इस फैसले को कैसे देखेंगी।

मुस्लिम पक्ष की सुप्रीम कोर्ट से वैकल्पिक राहत की मांग

मुस्लिम पक्ष के छह अपीलकर्ताओं की ओर से शनिवार को सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में वैकल्पिक राहत की मांग दी गई थी। मुस्लिम पक्ष की ओर से सील बंद लिफाफे में वैकल्पिक राहत दाखिल करने पर हिंदू पक्ष ने ऐतराज जताया था और इस बावत सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेट्री जनरल को पत्र भी दिया था। जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने रविवार को हिंदू पक्ष के वकीलों को वैकल्पिक राहत का कोर्ट में दिया गया ब्योरा उपलब्ध कराया। सुन्नी वक्फ बोर्ड की एक अपील में वकील शकील अहमद सहित कुल पांच वकीलों एजाज मकबूल, एमआर शमशाद, इरशाद अहमद और फुजैल अहमद की ओर से वैकल्पिक राहत की मांग पर स्टेटमेंट जारी किया गया है।

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