यहां हर धर्म के लोग माथा टेकते हैं, ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा पर्यटक गोल्डन टेंपल देखने जाते हैं

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गोल्डन टेंपल यानी अमृतसर का दिल। भले ही यह सिखों का देवस्थान कहा जाता है लेकिन यहां हर धर्म के लोग माथा टेकते हैं। भारत में ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा पर्यटक गोल्डन टेंपल देखने जाते हैं जिसे दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं यहां आना लंगर छकने के बिना अधूरा माना जाता है। फैमिली के साथ न्यू ईयर ट्रिप प्लान कर रहे हैं और इसकी शुरुआत धार्मिक टूरिस्ट प्लेसेस से करना चाहते हैं तो अमृतसर एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। मंदिर सुबह छह बजे से रात दो बजे तक खुला रहता है। अमृतसर का अमृतसर का राजा सांसी हवाई अड्डा दिल्ली और आसपास के राज्यों से जुड़ा है। अमृतसर के कई राज्यों से ट्रेन भी उपलब्ध हैं।

 

 

  1. सुबह गुरु से मिलने वाला ज्ञान कहलाया हुकमनामा

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    स्वर्ण मंदिर को पहले श्री हरमंदिर साहिब के नाम से जाना जाता  था। 16 अगस्त 1604 में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश उत्सव यहीं हुआ था। यहां सुबह के समय गुरु की ओर से मिलने वाले ज्ञान को हुकमनामा कहा जाता है। यह गुरु ग्रंथ साहिब से चुना जाता है। सुबह के समय तय न‍ियमों के अनुसार गुरु ग्रंथ साहिब को खोला जाता है। इस क्र‍िया को प्रकाश सेवा कहते हैं। इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब का कोई भी पेज खोला जाता है। इस पर आने वाला पहला शब्‍द (वाक्‍य) उस द‍िन की गुरु जी की ओर से श‍िक्षा बनता है। स‍िख पूरा द‍िन इस पर व‍िचार करते हैं और इसे अमल में लाते हैं।

  2. 1574 में सिखों के चौथे गुरु रामदासजी ने की थी स्थापना

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    स्वर्ण मंदिर की स्थापना 1574 में चौथे सिख गुरु रामदासजी ने की थी। पांचवे सिख गुरु अर्जुन ने हरमंदिर साहिब को डिजाइन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरमंदिर साहिब के अंदर सिख धर्म का प्राचीन इतिहास भी बताया गया है। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिलाओं के बीच का भेद मिटाकर ऐसी जगह बनाना था जहां दोनों समान रूप से भगवान की आराधना कर सकें। मंदिर को अमृत सरोवर के बीच में बनाया गया है जिसे बेहद पवित्र माना जाता है। यहां सिख धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक वस्तुओं रखा गया है, जिसे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु देखते हैं।

  3. हर दिशा से मंदिर में श्रद्धालुओं की एंट्री

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    यहां की खास बात है कि चारों दिशाओं से मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। गोल्डन टेंपल में चारों दिशाओं में दरवाजे खुलते हैं। जिसका मतलब है किसी भी धर्म का इंसान मंदिर में आ सकता है। वर्तमान में करीब सवा लाख से भी जादा लोग रोजाना यहां माथा टेकते हैं। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में ही महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब को कई बार आक्रमणों से बचाया और साथ ही गुरुद्वारे के ऊपरी भाग को सोने से ढक दिया, तभी से इस मंदिर की प्रसिद्धि को चार चांद लग गए।

  4. जलियावालां बाग : नरसंहार का गवाह बना बाग सुंदर पार्क में तब्दील

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    गोल्डन टेंपल के अलावा भी अमृतसर आने वाले पर्यटकों के लिए यहां का जलियावालां बाग देखने योग्य है, जो मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा नरसंहार अमृतसर के जलियावालां बाग में ही हुआ था। 13 अप्रैल, 1919 को अंग्रेजी सेनाओं की एक टुकड़ी ने निहत्थे भारतीय प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इसमें 1000 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई। आज यह बाग सुन्दर पार्क में तब्दील हो गया है और इसमें एक संग्रहालय भी बनाया गया। यहां घूमने का समय सुबह 9 से शाम 6 बजे तक का है।

  5. वाघा बॉर्डर : 1959 से अब तक जारी बीटिंग रिट्रीट समारोह

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    अमृतसर से मात्र 28 किलोमीटर दूर वाघा बॉर्डर जाना न भूलें। भारत-पाकिस्तान के इस बॉर्डर पर शाम को पाकिस्तानी और हिंदुस्तानी सैनिकों की तरफ से परेड आयोजित की जाती है। 1959 से लेकर आज तक हर शाम बॉर्डर पर यह बीटिंग रिट्रीट का समारोह बदस्तूर जारी है। स्वर्ण मंदिर से वाघा बॉर्डर जाने में लगभग एक घंटे का वक्त लगता है। आप यहां टैक्सी या शेयर्ड जीप लेकर पहुंच सकते हैं।

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