कोविड-19 महामारी मे अपने बूढे बुजुर्गो की सेवा खूब सेवा करे : मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक

चंडीगढ, कोविड-19 महामारी मे अपने बूढे बुजुर्गो की सेवा खूब सेवा करे, क्योकि बुजुर्गो का परिवार मे अपना अलग महत्व है। माता का हमेशा सम्मान हो मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढकऱ माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे। किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है, यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए।बाजी मार रही हैं लड़कियां अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है । विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक ने कहे।
मनीषीश्रीसंत ने अंत मे फरमाया जब तक महिलाएं अपने संबंध मे स्वयं चितंन न करें और देश भर मे जो ऐसी करोडो अभागी महिलाएं है जो अनेक प्रकार की  आपदाओं से ग्रस्त है, गरीबी, अशिक्षा, शोषण करने वाली मजदूरी तथा अनेक  अमानवीय संकटो से जूझ रही है। प्रश्न उन सबसे  भी है जो महिला अधिकारों के नाम पर वेश्या वृत्ति को सरंक्षण देते है, भारत देश पर इससे बडा कलंक और सामाजिक धब्बा क्या हो सकता कि भारत की लाखो बेटियां आज भी वेश्वावृत्ति को विवश  है और अनेक गायब हो चुकी बच्चियां इसी नर्क मे पहुंचाई जा रही है पर सरकारे और कानून के रक्षक सोए है महिला को अपने दुख सुख, समानता और अधिकारो के लिए प्रयत्न करना चाहिए, केवल वर्ष के दिन एक मे नही। आवश्यकता है उनकी और सहयोग एंव सहानुभूति का हाथ बढाएं जो आज भी अंधेरी दुनियां मे बंद है, प्रकाश से उनका क ोई परिचय नही है। महिला को अपने अधिकारों के लिए खुद को मानसिक रूप से बदलना होगा जब तक महिलाएं अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना शुरू करेगी ओर सकारात्मक सोच, लगन व परिश्रम के द्वारा संसार के सामने अपना लोहा मनाना चाहिए।

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