रुद्राक्ष धारण करने के चमत्कारी लाभ लेकिन नियम-संयम के साथ : बाबा-भागलपुर

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रुद्राक्ष भगवान शिव के अंग का प्रतीक माना गया है। रूद्+अक्ष= रूद्राक्ष। अतः इसकी उत्पत्ति भगवान शिव के आँसू से हुई है। इसे धारण करने वाले के जीवन में कोई समस्याएं नहीं आती है। ऐसी शास्त्रोंक्त मान्यता है। रुद्राक्ष के सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी  “बाबा-भागलपुर”, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रानुसार बतलाया कि:- रुद्राक्ष धारण करने वाले को अपने जीवन में कई नियम लागू करने पड़ते हैं। इसे अधिकतर गले में पहना जाता है। रुद्राक्ष भिन्न-भिन्न तरह के होते हैं और हर रुद्राक्ष के अलग-अलग फायदे होते हैं। सभी प्रकार के रुद्राक्ष धारण करने के एक जैसे ही नियम होते हैं। रुद्राक्ष हमारे जीवन में सभी तरह की सुख-समृद्धि लाता है पर इसे धारण करने के नियमों को अगर अपनाया ना जाए तो कई बार  रुद्राक्ष नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए इसे विधिपूर्वक धारण करना चाहिए और धारण करने के पश्चात संयमित रहना चाहिए।

रुद्राक्ष धारण करने के नियम:-

सभी प्रकार के रुद्राक्ष को पीतल के बर्तन में रख कर उस पर 108 बिल्वपत्र लेकर चन्दन से ॐ नम: शिवाय मंत्र लिखकर उसे रात्रि भर के लिए छोड़ दें। इसके बाद प्रातः काल स्नान-पूजा के तत्पश्चात ही धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष धारण करने के बाद अंडे, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज को त्याग देना चाहिए। रुद्राक्ष शिवलिंग अथवा शिव प्रतिमा से स्पर्श कराकर ही धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने के बाद सुबह-शाम भगवान शंकर का पूजन और “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने पर व्यक्ति को झूठ बोलने की आदत को छोड़ देना चाहिए, इससे भगवान शिव रूष्ट हो सकते हैं। रुद्राक्ष धारण करने के लाभ को वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रुद्राक्ष धारण करने से कई शाररिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है। वैज्ञानिक शोध में साबित हुआ है कि रुद्राक्ष हृदय रोग में बहुत लाभदायक होता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। मंत्र-विधान के साथ पहना हुआ रुद्राक्ष के प्रभाव से शोक, रोग, चोट, बाहरी प्रभाव, विष, प्रहार, असौन्दर्य, बांझपन, नपुंसकता आदि खत्म हो जाते हैं। कुछ अतिमहत्वपूर्ण और सर्वसुलभ रूद्राक्ष के गुणों पर दर्शा रहे हैं। जैसे कि:-  दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दाम्पत्य सुख में बढ़ोतरी व आपसी करूवाहट दूर होते हैं। तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से विभिन्न प्रकार का पाप समाप्त होता है। इसके अलावा सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शनि ग्रह जनित दोष से मुक्ति मिलती है और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

गुरु कृपा केवलम्।

जय माँ जय माँ जय जय माँ।
हo/
(दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी)
“बाबा-भागलपुर”
भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संस्थापक
ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार।
मोबाईल नo:- 09430815864/
09835070591

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