रक्षा बजट में कटौती से नहीं सुधरेंगे पाकिस्तान के हालात

समाचार क्यारी, राजेश कुमार :-

अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ खासकर अफगानिस्तान और भारत में अलगाववादियों, नक्सलाइट लोगों की रुपए-पैसे और बाकी तरह से मदद करने और अपने यहाँ आतंक की पाठशालाएं चलाने से पाकिस्तान की माली हालत पस्त हो चुकी है। पाकिस्तान अपने रक्षा बजट में कटौती की बात कर रहा है। पाकिस्तान की फौज ने स्वेच्छा से फैसला लिया है, कि वो अगले वित्तीय वर्ष के रक्षा बजट में कटौती करेगी. पाकिस्तान की सेना के तीनों अंग,यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना, इस कटौती का बोझ उठाएंगे. पाकिस्तान की असली समस्या वहाँ की जहालत है, वहाँ रोजगार का एक ही साधन समझ में आता है और वह है ‘आतंक-वाद’। पाकिस्तान जब तक सेना के कब्जे में रहेगा और अपने नागरिकों की भलाई की सोचते हुए एक कल्याणकारी राज्य बनाने की ओर अग्रसर नहीं होगा तब तक वहाँ के हालात नहीं सुधरेंगे।

‘कंगाली’ के दरवाज़े पर खड़े पाकिस्तान के हालात इतने ख़राब हो गए हैं, कि पाकिस्तान की सेना अब कह रही है, कि हम कम पैसे में काम चला लेंगे. पाकिस्तान की फौज ने स्वेच्छा से फैसला लिया है, कि वो अगले वित्तीय वर्ष के रक्षा बजट में कटौती करेगी. पाकिस्तान की सेना के तीनों अंग,यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना, इस कटौती का बोझ उठाएंगे. पाकिस्तान के पास पैसे की इतनी कमी है कि वहां के Officers Rank के अधिकारियों की तनख्वाह नहीं बढ़ाई जाएगी. हालांकि, सैनिकों को इससे अलग रखा गया है. पाकिस्तान की सेना ने कहा है कि उसने बलोचिस्तान और क़बायली इलाक़ों के विकास के लिए रक्षा बजट में कटौती की है.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी सेना के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि रक्षा बजट से बचाई गई रक़म को बलोचिस्तान और क़बायली इलाक़ों में ख़र्च किया जाएगा. पाकिस्तान के अखबार The Express Tribune के मुताबिक, अगले वित्तीय वर्ष का अनुमानित रक्षा बजट एक लाख 27 हज़ार करोड़ पाकिस्तानी रुपए है. इस में पूर्व सैनिकों की पेंशन और स्पेशल सैन्य पैकेज में होने वाले खर्च शामिल हैं.

विकास के नाम पर बलिदान का दावा कर रही पाकिस्तान की फौज एक सच छुपा रही है. वो सच ये है कि पाकिस्तान के ख़ज़ाने में पैसे नहीं हैं. उसे अपना ख़र्च चलाने के लिए दुनिया भर से उधार मांगना पड़ रहा है. पिछले महीने जब पाकिस्तान ने क़र्ज़ के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से समझौता किया, तो उसे अपने ख़र्च घटाने की शर्त माननी पड़ी. जब से पाकिस्तान ने IMF से समझौता किया है, तबसे वहां लगभग हर चीज़ की क़ीमतें काफी तेज़ी से बढ़ी हैं.

पाकिस्तान में पेट्रोल 112 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर से ज़्यादा हो गया है. पाकिस्तान में दूध क़रीब 120 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर है. खाने-पीने के सामान और सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं. शेयर बाज़ार की हालत ख़राब है. Pakistan Stock Exchange के CEO ने बिना कारण बताए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. पाकिस्तान की सबसे बड़ी परेशानी ये है, कि वहां पर कोई विदेशी निवेश नहीं आ रहा है.

इस साल पाकिस्तान की विकास दर सिर्फ 2.9 प्रतिशत रहेगी. जबकि World Bank के मुताबिक़ अगले दो साल तक भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. दूसरी तरफ पाकिस्तान की स्थिति लगातार बिगड़ती चली जाएगी. World Bank की मानें तो साल 2020 तक पाकिस्तान में महंगाई दर साढ़े 13 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी.

पाकिस्तान की इस दुर्दशा के लिए काफी हद तक भारत की आक्रामक कूटनीति भी ज़िम्मेदार है. क्योंकि, पुलवामा हमले के बाद भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर पाकिस्तान के खिलाफ अघोषित युद्ध का ऐलान कर दिया था. भारत ने पाकिस्तान से Most Favoured Nation का दर्जा वापस ले लिया था. Financial Action Task Force में पाकिस्तान की घेरेबंदी करके, उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने का दबाव भी भारत ने बनाया.

फिर भी, पाकिस्तानी सेना ने अपने खर्चों में ख़ुद से कटौती की, तो सोशल मीडिया पर उसकी तारीफ़ होने लगी. लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा, कि रक्षा बजट घटाने के बाद भी पाकिस्तान की सेना कंगाल नहीं होगी।क्योंकि, पाकिस्तान में सेना ही देश चलाती है. वहां के बड़े उद्योग भी सेना ही संचालित करती है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में पाकिस्तान, हथियारों पर खर्च करने वाला 20वां सबसे बड़ा देश था. 2018 में पाकिस्तान ने जो पैसा हथियारों पर खर्च किया, वो उसकी GDP के 4 प्रतिशत के बराबर था. 2018 और 2019 में पाकिस्तान का रक्षा बजट 66 हज़ार 500 करोड़ रुपये का है. सबसे बड़ी बात ये है, कि पाकिस्तान अपने सालाना बजट में 18 प्रतिशत से ज़्यादा पैसा रक्षा पर खर्च करता है. जबकि पाकिस्तान का शिक्षा बजट, उसके कुल बजट का सिर्फ 2 प्रतिशत है. पाकिस्तान के सालाना बजट में स्वास्थ्य का हिस्सा 1 प्रतिशत से भी कम होता है.

अगर कोई देश प्रगति करना चाहता है, तो उसे स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज़्यादा खर्च करना चाहिए. रक्षा पर कम. लेकिन पाकिस्तान में बिल्कुल उल्टा होता है. वैसे रक्षा बजट में पाकिस्तान की सेना कितनी कटौती करेगी, ये नहीं बताया गया है. लेकिन, पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने भारत के मीडिया को ज़रुर कोसा है.

उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के रक्षा बजट के आंतरिक विषय को भारत का मीडिया ग़लत तरीके से पेश कर रहा है. अपने Tweet में मेजर जनरल गफ़ूर ने भारत को धमकी भरे लहज़े में चेतावनी दी है. और कहा है, कि भारत ये ना भूले कि 27 फरवरी 2019 को यही पाकिस्तानी फौज थी. और यही रक्षा बजट था. आपको याद होगा, 26 फरवरी को बालाकोट हवाई हमले के बाद, पाकिस्तान की वायुसेना ने 27 फरवरी को भारतीय वायुसीमा में घुसपैठ की थी, जिसका भारत ने कड़ा जवाब दिया था और पाकिस्तान के एक लड़ाकू विमान को मार गिराया था. लेकिन, आसिफ गफूर ने ये भी कहा है, कि पाकिस्तान की सेना के पास क्षमता भी है. और जवाब देने की योग्यता भी है. और मुद्दा रक्षा बजट का नहीं है. बल्कि पाकिस्तान की सेना की काबिलियत का है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता का ये Tweet बताता है, कि रक्षा बजट में कटौती के नाम पर पाकिस्तान शायद कुछ छुपाने की कोशिश कर रहा है.

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