दिल्ली की सात सीटो के लिये आप जारी करेगी अलग घोषणा पत्र

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सात सीटों के लिये अलग-अलग घोषणापत्र जारी करेगी। दिल्ली में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को मतदान होगा। आप की दिल्ली इकाई के संयोजक गोपाल राय की अगुवाई में घोषणापत्र बनाने का काम अंतिम चरण में है। सूत्रों के अनुसार मतदान के लिये 16 अप्रैल को नामांकन शुरु होने से पहले पार्टी का घोषणापत्र जारी होगा। आप राष्ट्रीय स्तर पर एक घोषणापत्र जारी करने के अलावा दिल्ली में सात लोकसभा सीटों के लिये अलग घोषणापत्र जारी करेगी।

पार्टी के एक नेता ने बताया कि सभी लोकसभा क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं और इनके समाधान के लिये भविष्य की कार्ययोजना के साथ घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में आप ने एक ही घोषणापत्र जारी किया था। हालांकि, 2013 के विधानसभा चुनाव में आप ने सभी 70 विधानसभाओं के लिये अलग अलग घोषणापत्र जारी किये थे।

सभी लोकसभा क्षेत्रों के लिये जारी होने वाले घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है। इसमें दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के संकल्प को पूरा करने के लिये सभी सात सीटें आप को जिताने की जरुरत पर बल दिया जायेगा। साथ ही जनता को यह भी बताया जायेगा कि पूर्ण राज्य नहीं होने के कारण कानूनी बाधायें किस प्रकार से दिल्ली के विकास कार्यों को प्रभावित करती है। पूर्ण राज्य बनने पर इन कार्यों को अबाध रूप से किया जा सकेगा।

घोषणापत्र बनाने के काम में जनता की भी भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। इसके लिये पार्टी की जिला और ब्लॉक इकाइयां स्थानीय लोगों से बात कर समस्यायें और समाधान का संकलन कर रही है। इन्हें वार्ड, विधानसभा और फिर लोकसभा क्षेत्र के स्तर पर एकत्र कर संकल्प पत्र में समयबद्ध समाधान की कार्ययोजना के रूप में पेश किया जायेगा। समझा जाता है कि आप नेतृत्व ने अगले सप्ताह घोषणापत्र जारी करने का लक्ष्य तय किया था लेकिन, कांग्रेस के साथ गठबंधन के मामले में जारी गतिरोध की वजह से फिलहाल घोषणापत्र जारी करने पर अंतिम फैसला किया जाना बाकी है। कांग्रेस ने हाल ही में जारी किये अपने घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को जगह नहीं दी है। आप के एक नेता ने बताया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की स्थिति में यह शर्त भी रखी जायेगी कि कांग्रेस अपने घोषणापत्र में संशोधन कर पूर्ण राज्य की मांग को शामिल करे।

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