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पूर्व सैनिकों ने सेना के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत की

150 से अधिक पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राजनेताओं के खिलाफ शिकायत की है, जिनके बारे में इनका दावा है कि राजनेता सीमा पार हमले जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार सशस्त्र बलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पूर्व सैनिकों ने गुरुवार को लिखे एक पत्र में राष्ट्रपति से ‘सभी राजनीतिक दलों को तत्काल आवश्यक निर्देश देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया कि वे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सैन्य, सैन्य वर्दी या प्रतीकों और सैन्य कार्यों या कर्मियों की किसी भी कार्रवाई का राजनीतिक मकसद या अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल न करें।’ उन्होंने कहा है, ‘कुछ चिंताओं से सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के बीच काफी भय और बेचैनी पैदा की है।’

इन पूर्व सैनिकों ने चुनावी होर्डिग्स और पोस्टरों में सैनिकों की तस्वीरों के साथ भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है, जिन्हें पाकिस्तान ने पकड़ लिया था और फिर बाद में रिहा कर दिया था। पत्र में कहा गया है, ‘सैन्य अभियानों जैसे सीमा पार हमलों का श्रेय लेना और यहां तक कि सशस्त्र बलों के ‘मोदीजी की सेना’ होने का दावा करना राजनेताओं का असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकार्य कृत्य है।’

इसमें आगे कहा गया है कि चुनावी मंचों पर और प्रचार के दौरान पार्टी कार्यकर्ता सैन्य वर्दी पहने नजर आए हैं और पोस्टरों और तस्वीरों में सैनिकों खासकर विंग कमांडर अभिनंदन को प्रदर्शित किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल पूर्व सैनिकों में जनरल एस.एफ. रॉड्रिग्स, शंकर रॉय चौधरी, दीपक कपूर, एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास, विष्णु भागवत, अरुण प्रकाश, सुरीश मेहता और एयर चीफ मार्शल एन.सी. सूरी शामिल हैं। पत्र में, इन लोगों ने कहा कि हम इस बात की सराहना करते हैं कि कुछ वरिष्ठ सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों, जिनमें नौसेना स्टाफ के पूर्व प्रमुख से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक लिखित शिकायत शामिल है, को फौरन प्रतिक्रिया मिली है।

इसमें आगे कहा गया है कि वास्तव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित इन बयानों के लिए जिम्मेदार लोगों से एक स्पष्टीकरण जारी करने के लिए एक अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, हमें यह बताते हुए खेद है कि जमीनी स्तर पर ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि राजनेताओं के रुख में कोई बदलाव आया है।

पूर्व सैनिकों ने कहा है कि आम चुनाव के लिए मतदान के दिन करीब आने के साथ ही ऐसी घटनाओं के और बढ़ने की आशंका है। पत्र में कहा गया है, ‘हमें विश्वास है कि आप (राष्ट्रपति) निश्चित रूप से इस बात से सहमत होंगे कि भारतीय संविधान के अधीन और भारत के राष्ट्रपति की सर्वोच्च कमान के अधीन स्थापित सशस्त्र बलों के इस तरह के किसी भी दुरुपयोग से सैन्यकर्मियों के मनोबल और लड़ाकू दक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय अखंडता को प्रभावित कर सकता है।’ पूर्व सैनिकों ने पत्र में आगे कहा है कि हम इसलिए आपसे हमारे सशस्त्र बलों का धर्मनिरपेक्ष और एक राजनीतिक चरित्र संरक्षित रखने को सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं। इन लोगों ने आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को भी पत्र की एक प्रति भेजी है।

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