राम रहीम की फरलो को चुनौती देने वाली याचिका रद्द:हाईकोर्ट ने कहा- राम रहीम हार्डकोर क्रिमिनल नहीं

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समाचार क्यारी डेस्क ,पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले दी गई फरलो को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि गुरमीत राम रहीम सिंह हार्डकोर क्रिमिनल नहीं है जैसा की याचिका में दावा किया गया था। अभी विस्तृत फैसला आना बाकी है।

गुरमीत राम रहीम सिंह की फरलो को परमजीत सिंह सहोली नामक आजाद उम्मीदवार ने चुनौती दी थी। वह पंजाब विधानसभा चुनाव में खड़ा हुआ था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गत 25 फरवरी को मामले में बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस राज मोहन सिंह की बैंच ने फैसला सुनाया है।

गुरमीत राम रहीम की फरलो गत 27 फरवरी को समाप्त हो गई थी। 7 फरवरी को 21 दिन की फरलो दी गई थी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 20 फरवरी को थे। उसके बाद उसे फिर से रोहतक की सुनारिया जेल में भेज दिया गया था। वह गुरुग्राम के नामचर्चा घर में फरलो के दौरान ठहरा हुआ था। गौरतलब है कि 2 हत्याओं और साध्वियों से दुष्कर्म मामले में डेरा प्रमुख सजा काट रहा है। डेरा मुखी के खिलाफ 400 साधुओं को नपुंसक करने और बेअदबी का मामला लंबित है।

इस आधार पर फरलो रद्द करने की मांग उठाई थी

पटियाला निवासी सहोली ने गुरमीत राम रहीम की फरलो को चुनौती देते हुए कहा था कि डेरा प्रमुख हार्डकोर क्रिमिनल है। उसने फरलो के लिए न्यूनतम जेल अवधि पूरी नहीं की। हालांकि हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में साफ कर दिया था कि डेरा प्रमुख हार्डकोर क्रिमिनल नहीं है। साथ ही उसने जेल में फरलो के लिए न्यूनतम जेल अवधि भी पूरी कर ली थी। उसके जेल रिकॉर्ड को देखते हुए ही नियमों के तहत फरलो दी गई थी। सरकार की तरफ से रोहतक की डिस्ट्रिक्ट जेल के सुपरिटेंडेंट सुनील सांगवान का हलफनामा कोर्ट में पेश किया गया था।

कानून के तहत ही दी गई थी फरलो

सरकार ने जवाब में कहा था कि दुष्कर्म मामले में गुरमीत राम रहीम 7 फरवरी 2022 तक 6 साल, 1 महीना और 9 दिन की सजा काट चुका है। वहीं दोनों हत्याएं उसने खुद नहीं की थी, बल्कि साजिश में शामिल था। ऐसे में वह हार्डकोर क्रिमिनल की श्रेणी में नहीं आता। 7 फरवरी को हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेंपरेरी रिलीज) एक्ट की धारा 5ए के तहत यह फरलो दी गई थी। सरकार ने कहा था कि याचिका सियासी विचारों के तहत दायर की गई है, क्योंकि याची पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ रहा है। बिना किसी आधार के यह याचिका दायर की गई।

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