CBI की कार्रवाई की वजह से माल्या की तरह विदेश नहीं भाग पाएंगी चंदा कोचर

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और एमडी चंदा कोचर की मुसीबत और बढ़ गई है. सीबीआई ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. ये कार्रवाई वीडियोकॉन समूह को लोन देने के मामले में हुई है. अब वो बिना बताए विदेश नहीं जा पाएंगी. सीबीआई ने देश भर के सभी हवाई अड्डों को इस बारे में अलर्ट किया है. हवाई अड्डों पर तैनात सुरक्षा बलों को भी सचेत किया गया है. अभी ये साफ नहीं है कि लुकआउट सर्कुलर में सिर्फ अलर्ट ही है या चंदा कोचर की गिरफ्तारी की बात भी लिखी गई है. लुकआउट नोटिस होने के बाद भी शराब कारोबारी विजय माल्या के विदेश भाग जाने के बाद से सीबीआई फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. विजय माल्या के लुकआउट नोटिस में बदलाव कर दिया गया था. इस वजह से वो दिल्ली एयरपोर्ट से भाग निकला था.

सीबीआई के लुकआउट सर्कुलर में क्या है?
लुकआउट सर्कुलर में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के बारे में भी सूचना अपडेट की गई है. इनके खिलाफ पहले से ही सीबीआई का लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है. एफआईआर के बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. एफआईआर के बाद ये नोटिस जरूरी होता है. आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन लोन मामले में चंदा कोचर का पहले तो समर्थन किया. बाद में 18 जून 2018 को उन्हें बेमियादी छुट्टी पर भेज दिया. इसके बाद अक्टूबर, 2018 में चंदा कोचर को इस्तीफा देना पड़ा. जनवरी, 2019 में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के एमडी वेणुगोपाल धूत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. एजेंसी ने वीडियोकॉन कंपनी के मुंबई-औरंगाबाद स्थित दफ्तरों और दीपक कोचर के ठिकानों पर छापे भी मारे थे. वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 2012 में 3,250 करोड़ रुपए का लोन दिया था. फिर न्यू पावर रिन्यूएबल प्राइवेट लिमिटेड के साथ वीडियोकॉन के कई लेन-देन हुए. इस पर सीबीआई कार्रवाई कर रही है. न्यू पावर दीपक कोचर की कंपनी है.

मामला क्या है

# साल 2012 की शुरुआत में वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक से 3,250 करोड़ रुपए का लोन दिया गया. उस समय चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ थीं. आरोपों के मुताबिक वीडियोकॉन ग्रुप को लोन मिलने के बाद शेयरों के ट्रांसफर के जरिए चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को फायदा पहुंचाया गया था.

# दिसंबर 2008 में दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत ने न्यू पावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की. धूत के पास इस कंपनी में उनके परिवार और सहयोगियों के साथ 50 फीसदी शेयर थे. इस कंपनी में दीपक कोचर और उनके परिवार के मालिकाना हक वाली कंपनी पैसिफिक कैपिटल के पास बाकी 50 फीसदी शेयर थे.

#  2009 में धूत ने न्यू पावर के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और 2.5 लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर कोचर को ट्रांसफर कर दिए.

# मार्च 2010 में न्यू पावर ने धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी से 64 करोड़ रुपए का लोन लिया.

# इसके बाद कोचर और पैसिफिक कैपिटल ने न्यू पॉवर के अपने शेयर सुप्रीम एनर्जी को ट्रांसफर कर दिए. इस तरह मार्च, 2010 के आखिर में न्यू पावर में सुप्रीम एनर्जी के 94.99 फीसदी शेयर हो गए. उस समय बाकी 4.99 फीसदी शेयर कोचर के पास थे

# नवंबर, 2010 में धूत ने सुप्रीम एनर्जी में अपने सभी शेयर अपनी सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया को ट्रांसफर कर दिए.

# पुंगलिया ने अपने शेयर सितंबर, 2012 से अप्रैल, 2013 के बीच एक ट्रस्ट पिनैकल एनर्जी को ट्रांसफर कर दिए. इस ट्रस्ट में दीपक कोचर मैनेजिंग ट्रस्टी थे. पुंगलिया ने ये शेयर 9 लाख रुपए में ट्रांसफर किए.

चंदा कोचर आंतरिक जांच में भी दोषी
चंदा कोचर ने पिछले साल अक्टूबर में आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया था. बैंक ने उनके खिलाफ स्वतंत्र जांच कराई थी. इसकी रिपोर्ट भी पिछले महीने आ चुकी है. जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आईसीआईसीआई बैंक ने उनके इस्तीफे को बर्खास्तगी में बदलने का फैसला किया था. बैंक चंदा कोचर को दिए गए बोनस और इंप्लाईज शेयर की वसूली भी करेगा. चंदा कोचर से कुल 9 करोड़ 82 लाख रुपए के बोनस और 221 करोड़ रुपए मूल्य के शेयरों की रिकवरी हो सकती है. इसी मामले में सीबीआई चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ आपराधिक साज़िश रचने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच कर रही है.

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