चीन को झटका, रेलवे ने रद किया 471 करोड़ का ठेका

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रेलवे के इस फैसले को भारत और चीन के बीच बढ़ी तनातनी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चीनी कंपनी के ढीले रवैए और खराब प्रदर्शन को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। चीन की बिजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट आफ सिगनलिंग एंड कम्यूनिकेशन ग्रुप कंपनी रेलवे के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर प्रोजेक्ट में कानपुर से दीन दयाल नगर (मुगलसराय) के बीच 417 किमी की दूरी में सिगनल बिछाने का काम कर रही थी।लद्दाख में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत-चीन के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद पैदा हुए हालात में भारतीय रेलवे का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि रेलवे ने चीनी कंपनी के खराब प्रदर्शन को लेकर उसे पहले से ही लगातार चेतावनी देती रही है। इसीलिए भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी के खराब प्रदर्शन और धीमी प्रगति के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए से विश्व बैंक को अवगत करा दिया। उसने यह पत्र 20 अप्रैल 2020 को ही विश्व बैंक को भेज दिया था। ईस्टर्न फ्रेट कारिडोर प्रोजेक्ट में विश्व बैंक का पैसा लगा है। चीन की बिजिंग रेलवे रिसर्च एंड सिग्नल कम्यूनिकेशन कंपनी को 417 किमी लंबाई में सिग्नलिंग और कम्यूनिकेशन लाइन बिछाने के लिए 471 करोड़ का ठेका जून 2016 में दिया गया था।

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