आंगनवाडी महिलाएं लोकसभा चुनाव में करेंगे भाजपा का विरोध: कंचन

आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स यूनियन कि महिलाओं ने वर्ष 2018 में फरवरी 8 से 17 फरवरी व 18 से 7 मार्च तक उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया था तथा पूर्ण रूप से केन्द्र बंद हड़ताल भी
की थी। उस दौरान सरकार ने पूरे प्रदेश की 50 हजार से अधिक आंगनवाड़ी महिलाओं के सामने अपने घुटने टेकते हुए यूनियन के साथ बातचीत करके लंबित मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। यह जानकारी देते हुए यूनियन कि जिला सचिव कंचन ने बताया कि आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और यूनियन के बीच वर्कर्स को कुशल व अर्ध कुशल श्रमिक की श्रेणी में शामिल करने ,
ईएसआई व पीएफ सहित महंगाई भत्ता फरवरी 2018 से दिए जाने, हेलपर्स का भी पदनाम बदलकर अकुश श्रेणी में शामिल किए जाने व अतिरिक्त मानदेय दिया जाने , वर्कर्स व हैल्पर्स को भी सर्दियों व गर्मीयों का असल में अवकास प्रदान किया जाने तथा आंगनवाड़ी केन्द्रो के समय को भी कम किया जाने, हैल्पर से वर्कर व वर्कर से सुपरवाईजर की पदोन्नति केवल सीनियरटी के आधार पर हो तथा
उन पर लागई गई शर्ते हटाई जाने

आंगनवाड़ी केन्द्रों का किराया बड़े शहरों, छोटे शहरों व गावों में क्रमश: 5 हजार, 3 हजार व 750 लागू किए जाने और तमाम बकाया तुरंत प्रभाव से भूगतान किया जाने, मृत्यू होने की स्थिति में वर्कर्स व हैल्पर्स के परिवारजनों को 3 लाख रूपये एक्ग्रेशिया दिए जाने, आंगनवाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स को सेवानिवृति का लाभ दिया जाए, सितंबर से प्रदेश के सभी जिलों में केन्द्र से मिलने वाला मानदेय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 व 750 रूपये का ऐरियर समेत तुरंत भुगतान किए जाने जाए, 45वें श्रम सम्मेलन के अनुसार कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और न्यूनमत वेतन 18 हजार हो व पैंशन सहित तमाम सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाने आदि मांगों पर लेकर सरकार व अधिकारियों के साथ तुरंत  प्रभाव से लागु करने का लवली पॉप दिया था जिस पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

जिससे आंगनवाड़ी महिलाओं में भारी रोष व्यापत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता के खुन पसीने की गाढ़ी कमाई को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के झुठे डकोसलों में पानी की तरह बहा दी वहीं दुसरी तरफ आंगनवाड़ी सेन्टरों पर काम कर रही महिलाओं व बेटियों के भविष्य के साथ भारी खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो लोकसभा चुनावों व प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में आंगनवाड़ी
महिलाओं सरकार की नीतियों की पोल खोलेंगे तथा भाजपा के प्रति वोट न देने की अलख जगाएंगी।

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