नेपाल सरकार ने बयान जारी कर दी सफाई, ‘चीन नहीं चुरा रहा जमीन’

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नेपाली मीडिया में पिछले दिनों ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि तिब्बत में सड़क निर्माण के बहाने चीन नेपाल के क्षेत्रों पर कब्जा बढ़ाता जा रहा है। साथ ही, कुछ इलाकों में नेपाल और चीन के बीच सीमांकन को लगाए खंभे गायब होने की भी खबरें थीं। अब देश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इन खबरों का खंडन किया है। बयान में कहा गया है कि जिन खंभों के गायब होने की बात कही जा रही है, वे दरअसल वहां थे ही नहीं। हालांकि, सरकार ने अपने बयान में तिब्बत में नदियों का रास्ता मोड़कर जमीन कब्जाने को लेकर कुछ नहीं कहा है।

मंत्रालय कर चुका है खंडन
मंत्रालय ने कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में नेपाल-चीन सीमा को लेकर अतिक्रमण की बात कही गई है। यह खबरें कृषि मंत्रालय की उस कथित ‘रिपोर्ट’ पर आधारित हैं जिसका मंत्रालय पहले ही खंडन कर चुका है और यह मामला उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता है। मंत्रालय का कहना है कि नेपाल और चीन के बीच 5 अक्टूबर, 1961 सीमा संधि के तहत सीमांकन किया गया था और प्रोटोकॉल पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थए।

‘कभी लगे ही नहीं थे खंभे’
साथ ही मंत्रालय ने यह सफाई भी दी है कि जिन 37 और 38 नंबर के जिन स्तंभों के गायब होने की बात कही जा रही है, वे दोनों देशों की सहमति पर प्राकृतिक हालात को देखते हुए कभी लगाए ही नहीं गए थे। मंत्रालय का कहना है कि अगर कोई मुद्दा होता है तो नेपाल सरकार संबंधित अधिकारियों से बात करके इसे सुलझा लेगी। मंत्रालय ने मीडिया से संवेदनशील मामला बताते हुए मीडिया से कॉमेंट करने से पहले जानकारी की पुष्टि करने की बात कही ताकि दो दोस्त देशों के बीच संबंधों पर खराब असर न हो।

विपक्ष ने की थी ऐक्शन की मांग
इन खबरों के आने के बाद नेपाल की विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने संसद के निचले सदन में चीन के अतिक्रमण को रेग्युलेट करने की मांग करते हुए प्रस्ताव दिया था। नेपाली कांग्रेस के सांसद देवेंद्र राज कंदेल, सत्य नारायण शर्मा खनाल और संजय कुमार गौतम ने यह प्रस्ताव पेश किया है। इसके मुताबिक, ‘चीन ने दोलका, हुमला, सिंधुपलचौक, संखूवसाभा, गोरखा और रसूवा जिलों में 64 हेक्टेयर की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है।’

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