जिस गवाह ने सज्जन कुमार को पहुंचाया जेल तक

नई दिल्ली  सिख विरोधी दंगा मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए आज यानी सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा सुना दी। सज्जन कुमार को दंगा भड़काने और साजिश रचने के अपराध में आजीवन कैद की सजा सुनाई गई है। हालांकि इस केस में सज्जन कुमार को हत्या के मामले में बरी कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत का वह फैसला पलट दिया है जिसमें सज्जन कुमार को बरी किया गया था। आपको बता दें कि कांग्रेस नेता को सजा तक पहुंचाने में सिख दंगे के पीडि़त एक गवाह ने लंबी लड़ाई लड़ी। उस पीडि़त गवाह की गवाही ने ही कांग्रेस नेता कुमार को जेल तक पहुंचाया है। अब वह गवाह थोड़ा सकून महसूस कर रहा है।

जानकारी में रहे कि इस केस के सबसे अहम गवाहों में से एक थे जगशेर सिंह। उन्होंने मीडिया को बताया कि नरसंहार में कैसे उनका परिवार खत्म हो गया। रोजगार का कोई जरिया नहीं बचा। ऐसे में दिल्ली छोड़कर वह पंजाब चले गए और वहीं बस गए। अपनों को खोने के बाद न्याय की लंबी लड़ाई लडऩे वाले जगशेर की कहानी बेहद मार्मिक है। इसे आपको भी जानना चाहिए।

न्होंने बताया कि अब मुझे कुछ सकून मिला है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि जिस हिसाब से उन्होंने अपराध किया इन्हें सजा नहीं मिली है लेकिन लोगों को पता तो चल गया है कि इसने यह काम करवाया था। इसने ही मरवाया है। यह रात को नहीं आता, तो मेरे तीनों भाई बच जाते। सज्जन ने बोला था कि जो हिंदू बचाता है, उसको भी मारो। हिंदुओं के घरों पर भी अटैक करवाया। इसको मिलनी तो फांसी की सजा चाहिए थी।

सिख दंगे की भयावहता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जगशेर के एक भाई को उनके सामने आग लगाकर जला दिया गया था और बाकी दो को भी मार दिया था। जगशेर ने बताया कि 1 नवंबर को ऐसा मंजर देखा है जो किसी ने शायद अपनी जिंदगी में नहीं देखा होगा। मेरा हंसता खेलता परिवार सिर्फ एक भड़काऊ भाषण ने उजाड़ दिया। मेरे बाल कटे हुए थे इसलिए मैं बच गया लेकिन भड़काऊ भीड़ ने जानवरों की तरह लाशों को नोचा और काटा।

जगशेर ने बताया कि 30 अप्रैल 2013 को जज जे.आर. आर्यन ने सज्जन कुमार को बरी किया था। जबकि उसके दो साथी पूर्व विधायक महेन्द्र यादव व पूर्व पार्षद बलराम खोखर को उम्रकैद और 3 अन्य को 3 साल की सजा सुनाई गई थी। सज्जन कुमार को बरी करने के बाद 1 मई से 6 मई तक दिल्ली कमिटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के नेतृत्व मे सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन किया गया था। 1 मई को तिलक नगर में विशाल प्रदर्शन करते हुए सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो ट्रैक को जाम कर दिया था। कांग्रेस मुख्यालय का घेराव भी किया गया।

इस मामले में हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर 2018 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेजिडेंट मनजीत सिंह जीके ने कहा कि महिपालपुर केस में एक को फांसी एक को उम्र कैद हुई, त्रिलोकपुरी में सभी दोषियों को सजा बहाल हुई और अब हमें उम्मीद है कि हाई कोर्ट भी सज्जन कुमार को सख्त सजा सुनाएगा। आपको बता दें कि डीएसजीपीसी के लीगल सेल ने यह केस लड़ा था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे फैल गए थे। इस दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर में पांच सिखों केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस दंगे की भेंट चढ़े केहर सिंह इस मामले की शिकायतकर्ता जगदीश कौर के पति थे, जबकि गुरप्रीत सिंह उनके बेटे थे। इस घटना में मारे गए अन्य सिख दूसरे गवाह जगशेर सिंह के भाई थे।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2005 में जगदीश कौर की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश पर दिल्ली कैंट मामले में सज्जन कुमार, कैप्टन भागमल, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, गिरधारी लाल, कृष्ण खोखर और पूर्व पार्षद बलवंत खोखर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआइ ने सभी आरोपियों के खिलाफ 13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया था।

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