हिन्दू धर्म में कुंभ मेले का बहुत की खास महत्व है

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हिन्दू धर्म में कुंभ मेले का बहुत की खास महत्व है। बहुत भारी संख्या में श्रद्धालु इन स्थानों पर पहुंचकर स्नान कर पापों से मुक्ति पाते है। यहां यदि हम बात कुंभ मेले के इतिहास की करें तो ये कम से कम 850 साल पुराना है। और माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसकी शुरुआत की थी, लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही हो गई थी।

कब से हो रहा है मेले का आयोजन
इस बार 2019 में कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जा रहा है। प्रयागराज में अर्धकुंभ 15 जनवरी 2019 से प्रारंभ हो जाएगा और 04 मार्च 2019 तक चलेगा। देश के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ की परंपरा बहुत पुरानी परंपरा है।

कुंभ मेले का आयोजन वैसे तो हजारों साल पहले से हो रहा है। लेकिन मेले का प्रथम लिखित प्रमाण महान बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग के लेख से मिलता है जिसमें छठवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासन में होने वाले कुंभ का प्रसंगवश वर्णन किया गया है।

प्रयाग में कुंभ पर्व और ग्रहों का संयोग
प्रयाग कुंभ का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह 12 वर्षो के बाद गंगा, यमुना एवं सरस्वती के संगम पर आयोजित किया जाता है। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयाग में किया जाता है।

अन्य मान्यता अनुसार मेष राशि के चक्र में बृहस्पति एवं सूर्य और चन्द्र के मकर राशि में प्रवेश करने पर अमावस्या के दिन कुंभ का पर्व प्रयाग में आयोजित किया जाता है। एक अन्य गणना के अनुसार मकर राशि में सूर्य का एवं वृष राशि में बृहस्पति का प्रवेश होनें पर कुंभ पर्व प्रयाग में आयोजित होता है।

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