सिख फार जस्टिस को लेकर अकाली दल ने कांग्रेस से सवाल किया

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चंडीगढ़: मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा पाकिस्तान आर्मी और प्रधानमंत्री को सिख फॉर जस्टिस को लेकर जिस तरह से बयान जारी किया है उस में विपक्षी दलों ने एक बार फिर से सवाल खड़ा किया है कि आखिर जब करतारपुर कॉरिडोर खुलने को लेकर रास्ता बनता हुआ दिखाई दे रहा है तो आखिर इस तरह की बयानबाजी मुख्यमंत्री क्यों कर रहे हैं क्योंकि अगर किसी तरह की उनको सुरक्षा पर फिक्र है तो देश की सुरक्षा एजेंसियों से देख रही हैं और यह पहला रास्ता नहीं है बल्कि इसके अलावा भी और रास्ते खुले हुए हैं लेकिन ऐसी आशंकाएं पहले ही नहीं लगाई जा सकती ताकि रास्ते के खुलने को लेकर किसी तरह की आंच आए ऐसे में तो यह भी प्रतीत होता है कि सरकार रास्ते के खुलने से खुश नहीं है।

सिख फार जस्टिस को लेकर अकाली दल ने कांग्रेस से सवाल किया है कि पहले वह अंदर बैठकर निश्चित तो कर ले कि आखिर उसके पक्ष में है या विपक्ष में क्योंकि जब लंदन के बीच में कनखल एवं उनका होता है तो उसमें कई आरोप ऐसे लगे हैं कि पंजाब के मंत्री महान मीटिंग करके आए हैं वहीं सिख फॉर जस्टिस पर गाड़ी में धरने पर बैठे लोगों को सपोर्ट करते हैं जिसके पक्ष में सरकार थी क्योंकि जिस तरह से भूमिका अभी तक सामने गया तो उसमें यह है कि अंदर बैठकर ऐसे लोगों के साथ में बैठकर होती हैं और बाहर पाकिस्तान आर्मी को उनके खिलाफ अब कहा जा रहा है ऐसे में पहले कांग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कोर कमेटी की बैठक पर बोलते हुए दलजीत चीमा ने कहा कि इस बैठक में जिस तरह से पंचायती चुनावों को लेकर जो खबरें आ रही हैं दिखा रही कि उस पर चर्चा की जाएगी क्योंकि पहले की तरह ही किसी को सर्टिफिकेट नहीं दिया जा रहा किसी को नॉमिनेशन फाइल नहीं करने दिया जा रहा है और हो सकता है कि आगे रात भी किया जाए बेशक पार्टी सिंबल पर चुनाव नहीं लड़े जा रहे हैं लेकिन ऐसे में लोकतांत्रिक तौर पर होने वाली चुनाव में इस तरह की है घटनाएं नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस सरकार की तरफ से की जा रही कर्जा माफी और बाकी राज्यों में भी कांग्रेस जिस तरह से कर्जा माफी कर रही है उसमें गाली देने सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिस तरह से पंजाब के किसान के साथ धोखा हुआ है वही धोखा राजस्थान के किसान के साथ होगा और वही मध्य प्रदेश के किसान के साथ होगा क्योंकि पहले कांग्रेस 90 हजार करोड़ के कर्ज की बात करती थी लेकिन आज देखा जाए तो उसमें से कितना माफ किया गया वह सबके सामने है दो लाख से ज्यादा किसी भी किसान का कर्जा माफ नहीं किया है और जिसका दो लाख से ज्यादा कर्ज है उसको स्कीम का कोई फायदा नहीं हुआ है क्योंकि जो आत्महत्या करता है कम कर्ज वाला किसान नहीं करता बल्कि भुगतान करता है जिसके सर पर ज्यादा कर्ज है और जिस तरह से आढ़तियों का कर्जा माफ करने की बात सरकार करती थी तो वह किसी का भी नहीं किया गया है।

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