शीत सत्र समाप्त होते ही आम चुनावों की तारीखों की घोषणा हो सकती है

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लोकसभा का शीत सत्र समाप्त होते ही आम चुनावों की तारीखों की घोषणा हो सकती है। इसी के साथ शुरू हो जाएगा चुनावी रैलियों का सफर। चुनावी तैयारियों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कार्ययोजना भी अंतिम रूप में पहुंच गई है। प्रधानमंत्री लगभग सौ चुनावी सभाएं और रैलियां करेंगे। उनकी अंतिम रैली दो मार्च को होगी।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा उत्तर प्रदेश में खास तरह की तैयारी कर रही है। 2014 में पूरे देश में मोदी लहर थी जिसका फायदा भाजपा को जमकर मिला था। सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से 73 भाजपा और उसके सहयोगी दल (अपना दल) के खाते में आई थी। लेकिन इस बार बदलते परिवेश की वजह से भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

जिस तरह से पिछले दिनों प्रधानमंत्री के बनारस दौरे का अपनादल ने विरोध किया वह पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। वहीं दूसरा बड़ा कारण सपा और बसपा के बीच महागठबंधन की संभावना है। अभी भले ही सपा और बसपा के बीच में गठबंधन होने की खबरें आ रही हैं, लेकिन उ.प्र. के गोरखपुर जिले से आने वाले भाजपा के राज्यसभा सांसद का कहना है फरवरी के पहले सप्ताह से तस्वीर बदलने के आसार हैं।

राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह का भी कहना है कि प्रदेश के हर कोने में महागठबंधन की चर्चा है। यह चर्चा राजनीतिक दल नहीं, बल्कि जनता कर रही है। अजीत सिंह का कहना है कि भाजपा को छोड़कर चाहे सपा हो या बसपा, कांग्रेस हो या कोई अन्य दल, महागठबंधन को इनकार नहीं कर सकता। चौधरी के अनुसार यदि महागठबंधन से परहेज हुआ तो यह विपक्षी दलों की बहुत बड़ी राजनीतिक भूल होगी।

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