चुनौतियों का सामना करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ी रणनीति तैयार की

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन और गांधी परिवार की अहम सदस्य प्रियंका गांधी के सियासत में प्रवेश से उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ी रणनीति तैयार की है।

इस रणनीति के तहत शाह 30 जनवरी से 8 फरवरी के बीच छह बैठकों के जरिए करीब डेढ़ लाख बूथ प्रमुखों से सीधा संवाद करेंगे। इस क्रम में शाह कुंभ में डुबकी के जरिए हिंदुत्व की राजनीति को नई धार देने के साथ ही सहयोगियों अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के गिले शिकवे भी दूर करेंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक शाह की योजना बूथ प्रबंधन के जरिए मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान के तहत मत प्रतिशत को हर हाल में बढ़ाने की है। यही कारण है कि राज्य इकाई को सूबे के सभी छह क्षेत्रों से जुड़े बूथ में तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।

अपने यूपी दौरे में शाह 30 जनवरी को कानपुर और लखनऊ में, 2 और 6 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और 8 फरवरी को गोरखपुर और वाराणसी में बूथ प्रमुखों की बैठकों को अलग-अलग संबोधित करेंगे। हर बैठक में करीब 25 हजार बूथ प्रमुख मौजूद रहेंगे। इसके अलावा इन बैठकों में सीएम, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री, चुनावी प्रभारी और सह चुनाव प्रभारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।

सहयोगियों के गिले शिकवे करेंगे दूर

हालांकि अभी तारीख तय नहीं है, मगर अपने यूपी प्रवास के दौरान शाह की योजना नाराज चल रहे अपना दल और एसबीएसपी के गिले शिकवे दूर करेंगे। अपना दल लगातार राज्य सरकार और राज्य इकाई पर उपेक्षा करने का आरोप लगा रहा है, जबकि एसबीएसपी के मुखिया राजभर राज्य के साथ साथ केंद्र सरकार पर भी हमलावर है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि सपा-बसपा गठबंधन की गंभीर चुनौतियां झेल रही पार्टी इस गठबंधन के कारण राजग में किसी तरह के बिखराव का संदेश नहीं देना चाहती। ऐसे में नेतृत्व ने दोनों सहयोगियों को हर हाल में मनाने का फैसला लिया है। शाह की योजना पहले इन दोनों दलों के मुखिया से दिल्ली में मुलाकात करने की थी, मगर खराब स्वास्थ्य के कारण इसे टाल दिया गया था।

बूथ प्रमुखों के यह देंगे संदेश 
शाह बूथ प्रमुखों को समर्थक मतदाताओं का वोट हर हाल में 10 बजे तक गिराने, पहली बार मत डाल रहे युवाओं और केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों से लगातार संपर्क साधने, सपा-बसपा गठबंधन को यादव-जाटव गठबंधन के रूप में प्रचारित करने का संदेश देंगे। बैठक में बूथ स्तर की तैयारियों के लिए समय समय पर दिए गए निर्देर्शों के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी गंभीर मंथन होगा।

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