कभी भुवनेश्वनर घूमने का मौका मिले तो इसे कभी भी मिस न करें

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उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्र्वर कई मायनों में खास है। मंदिरों का शहर कही जाने वाली इस जगह के बारे में एक कहावत बहुत प्रचलित है कि यहां साल के 12 महीनों में 13 त्योहार मनाए जाते हैं। और हर एक का अंदाज अलग, एन्जॉयमेंट अलग। तो अगर आपको कभी भुवनेश्वनर घूमने का मौका मिले तो इसे कभी भी मिस न करें।

पुरी से कोणार्क रोड ट्रिप

सबसे अच्छी बात है कि पुरी से कोणार्क के सफर के लिए आपको वीकेंड तक का इतंजार नहीं करना पड़ता। अगर आप भुवनेश्र्वर में हैं तो महज 159 किमी मतलब 6-7 घंटे की ड्राइव करके आप यहां पहुंच जाएंगे। पुरी की पुरानी सड़क ज्यादा एन्जॉयफुल है। जिसमें सड़कों के किनारे लगे नारियल के पेड, गांव के छोटे-छोटे घर, खेत-खलिहान और कुछ सूखे पेड़ सड़क की शोभा बढ़ाते हुए नज़र आते हैं। नई 6 लेन सड़क से आप लगभग 40 मिनट में धौलीगिरी पहुंचेंगे।

धौलीगिरी

धौलीगिरी एक पुराना बौद्ध स्मारक है ‘द पीस पेगौडा’ जिसे सम्राट अशोक ने बनवाया था। कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया लिया था। ये स्मारक उसी की निशानी है। यहां उगते और ढलते सूरज को देखने का नज़ारा ही अलग होता है।

पीपली गांव

यहां से आगे बढ़ने के बाद आपका पहुंचेंग पीपली। खूबसूरत और छोटा सा शहर पीपली अपने सजावटी सामानों के लिए जाना जाता है। जिसे सड़कों से गुजरते हुए आसानी से देखा जा सकता है। पीपली ने इसकी बदौलत महज पुरानी कला को ही कायम नहीं रखा है बल्कि इसके जरिए यहां के लोग अपना जीवनयापन भी करते हैं। तो पीपली रूककर यहां से इन सामानों को खरीददारी जरूर करें।

सफर का अगला पड़ाव है सखीगोपाल गांव। ये भी गांव बहुत बड़ा नहीं लेकिन सखीगोपाल मंदिर की वजह से बहुत ही मशहूर है। यहां बहुत सारे छोटे-छोटे ढाबे हैं जहां आप पेटपूजा कर सकते हैं और नारियल पानी पी सकते हैं। यहीं नज़दीक एक और छोटा सा गांव है चंदनपुर, जो जैन खानपान के लिए जाना जाता है। बिना लहसुन-प्याज के इस्तेमाल के बाद भी हर एक डिश का स्वाद ऐसा होता है कि कोई भी बस उंगुलियां चाटते रह जाए।

यहां से आगे बढ़ते ही आप पहुंचेंगे पवित्र शहर पुरी में। जहां की रथ यात्रा दुनियाभर में मशहूर है। जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें। वैसे क्या आप जानते हैं पुरी का गोल्डेन बीच दुनिया के सबसे अच्छे बीच में से एक है। जिसकी वजह से यहां हमेशा ही लोगों की बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है।

यहां आकर मशहूर स्टोन कारवर्स ऑफ उड़ीसा को देखने भी जरूर जाएं। यहां 30 रूपए से लेकर 30 लाख तक के सामान मिलते हैं। बेलेशोर और रामाचंदी जो समुद्र के किनारे बने मंदिर हैं। ये पूरा ही क्षेत्र वाइल्डलाइफ सेंचुरी से भरा हुआ है।

कोणार्क का सूर्य मंदिर

इससे आगे ड्राइव करके आप कोणार्क के ब्लैक पेगौड़ा और चंद्रभाग बीच पर पहुंचेंगे। कोणार्क में बहुत ही पुराना सूर्य मंदिर है जो कई मामलों में खास है। जिसे जानने और देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते हैं। तो ये आपकी यात्रा का अंतिम और बहुत ही खूबसूरत पड़ाव है जिसे बिल्कुल भी मिस न करें।

कब आएं

पुरी से कोणार्क के सफर के लिए अक्टूबर से जनवरी का महीना परफेक्ट होता है। भुवनेश्वर, लगभग सभी बड़े शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। पुरी से कोनार्क का सफर सिर्फ सड़क और रेल द्वारा ही मुमकिन है। मोटरसाइकिल और कारें बहुत ही किफायती दामों पर रेंट पर मिल जाती हैं।

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